Manappuram Finance: ब्रोकरेज का भरोसा बढ़ा! 'Buy' रेटिंग के साथ ₹340 का टारगेट, Q4 नतीजों ने लगाई छलांग

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AuthorAditya Rao|Published at:
Manappuram Finance: ब्रोकरेज का भरोसा बढ़ा! 'Buy' रेटिंग के साथ ₹340 का टारगेट, Q4 नतीजों ने लगाई छलांग
Overview

Manappuram Finance के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। ब्रोकरेज फर्म Axis Securities ने कंपनी को 'Buy' रेटिंग दी है और ₹340 का टारगेट प्राइस सेट किया है, जो मौजूदा स्तरों से करीब **11%** की तेजी का संकेत देता है। यह रेटिंग कंपनी के दमदार Q4 FY26 नतीजों और मार्जिन में स्थिरता की उम्मीदों पर आधारित है।

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एनालिस्ट अपग्रेड से Manappuram Finance को बूस्ट

Axis Securities ने Manappuram Finance पर अपना विश्लेषण शुरू किया है और इसे 'Buy' रेटिंग के साथ ₹340 का टारगेट प्राइस दिया है। यह मौजूदा भावों से लगभग 11% की तेजी का इशारा है। ब्रोकरेज हाउस का यह भरोसा कंपनी के Q4 FY26 के शानदार नतीजों पर आधारित है, जिसमें कंपनी ने पिछले साल के ₹191 करोड़ के लॉस की तुलना में ₹404 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया। कंपनी की कुल आय भी साल-दर-साल 11% बढ़कर ₹2,626 करोड़ रही। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी के गोल्ड एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मजबूती, फंडिंग कॉस्ट में स्थिरता और क्रेडिट कॉस्ट में कमी के चलते नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) में स्थिरता आएगी। अगले कुछ सालों में कंपनी के रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) के 13-16% रहने का अनुमान है। फिलहाल, शेयर ₹294-₹305 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹25,800 करोड़ है।

बैंकों से गोल्ड लोन में कड़ी टक्कर

कंपनी के मैनेजमेंट का भी मानना है कि वे 13-16% का RoE हासिल कर लेंगे, जिसका मुख्य कारण NIMs का लगभग 9.3% पर स्थिर रहना और क्रेडिट कॉस्ट का कम होना है। हालांकि, इस सकारात्मक तस्वीर के बीच, कंपनी को एक बदलते कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप का सामना करना पड़ रहा है। गोल्ड लोन मार्केट में बैंकों की पैठ लगातार बढ़ रही है। मार्च 2025 तक बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 49.7% हो गई है, जबकि 2020 में यह केवल 30.6% थी। यह नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (NBFCs) के लिए एक बड़ी चुनौती है।

नियामकीय और कंप्लायंस के मुद्दे बरकरार

यह भी गौर करने वाली बात है कि NBFCs के गोल्ड लोन AUM में जो ग्रोथ दिख रही है, वह काफी हद तक सोने की बढ़ती कीमतों का नतीजा है, न कि लोन वॉल्यूम में हुई वास्तविक बढ़ोतरी का। यह भविष्य की ग्रोथ की सस्टेनेबिलिटी पर सवाल खड़े करता है। इन सबके अलावा, Manappuram Finance को कई नियामकीय और कंप्लायंस संबंधी मुद्दों का भी सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2026 में RBI ने वेरिएबल पे (Variable Pay) के मुद्दों पर ₹2.70 लाख का जुर्माना लगाया, तो दिसंबर 2024 में KYC कंप्लायंस में कोताही के लिए ₹20 लाख का फाइन लगाया गया। हाल ही में, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) V.P. Nandakumar को SEBI से शेयर गिरवी रखने के संबंध में देरी से खुलासा करने पर चेतावनी मिली, हालांकि कंपनी ने कहा कि इसका कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मिले-जुले एनालिस्ट व्यू और सेक्टर आउटलुक

NBFCs सेक्टर नए लोन-टू-वैल्यू (LTV) नॉर्म्स से भी प्रभावित हो रहा है, जो लेंडिंग पैरामीटर्स को बदल सकते हैं, खासकर बुलेट लोन के लिए। मार्च 2026 में अप्रूव हुए ₹2,192 करोड़ के प्रीफरेंशियल इश्यू से होने वाले डाइल्यूशन को लेकर भी चिंताएं हैं। Manappuram Finance देश की दूसरी सबसे बड़ी गोल्ड फाइनेंस NBFC है, लेकिन IIFL Finance जैसी कंपनियाँ कुछ एनालिस्ट्स की नजर में ज्यादा पोटेंशियल अपसाइड टारगेट रखती हैं। कंपनी ने FY26 के लिए ₹0.50 प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया है। कुल मिलाकर, एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है, जिसमें 'Buy' से 'Hold' तक की रेटिंग और ₹300-₹315 के आसपास का औसत टारगेट प्राइस शामिल है। NBFC सेक्टर का आउटलुक स्टेबल बना हुआ है, लेकिन ICRA का अनुमान है कि FY27 में ग्रोथ घटकर 16-17% रह सकती है। ऐसे में, कंपनी की नॉन-गोल्ड सेगमेंट में एसेट क्वालिटी को बनाए रखते हुए गोल्ड लोन ग्रोथ को बैलेंस करने की रणनीति इन बदलते बाजार की गतिशीलता को नेविगेट करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.