गोल्ड लोन की तेजी, पर मार्जिन पर लगा झटका
Manappuram Finance ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 404.79 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि में हुए नेट लॉस से एक बड़ी रिकवरी है। कंपनी के रेवेन्यू में 10% की बढ़ोतरी हुई और यह 2,613.83 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 2,331 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो कि पिछली बार के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा है।
लेकिन, तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि कंपनी का नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 1,404 करोड़ रुपये पर सपाट रहा। यह तब है जब कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 48.3% बढ़कर 63,798 करोड़ रुपये हो गया। NII का स्थिर रहना यह दर्शाता है कि लोन बांटने से होने वाली आय में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिसका सीधा मतलब है कि कंपनी के लेंडिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।
वैल्युएशन और कॉम्पिटिशन की चिंताएं
गोल्ड लोन देने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर के तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि मार्च 2027 तक इस सेक्टर का AUM 4 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा। इस सेक्टर में Manappuram Finance की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 25,829 करोड़ रुपये है और इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 15.94 के आसपास है।
वहीं, इसका मुख्य कॉम्पिटिटर Muthoot Finance का मार्केट कैप 1.40 लाख करोड़ रुपये है और इसका P/E रेश्यो भी 15-16 की रेंज में है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार Manappuram Finance का P/E रेश्यो 60 के पार तक जाता दिख रहा है, जो इसे अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में महंगा बना सकता है।
मार्जिन पर दबाव और हाई वैल्युएशन मुख्य रिस्क
AUM में लगभग 50% की ग्रोथ के बावजूद NII का सपाट रहना एक बड़ी चिंता का विषय है। यह बताता है कि बढ़ी हुई लोन वॉल्यूम से आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जो नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर इंटेंस प्रेशर की ओर इशारा करता है। यह फंड की बढ़ती लागत या कॉम्पिटिशन के कारण लोन रेट कम करने की मजबूरी का नतीजा हो सकता है।
कंपनी का वैल्युएशन भी एक महत्वपूर्ण रिस्क है। P/E रेश्यो में 60 गुना से अधिक की रिपोर्टिंग, इसके पीयर Muthoot Finance से काफी ज्यादा है और असाधारण प्रॉफिट ग्रोथ के बिना टिकाऊ नहीं हो सकता। यह प्रीमियम वैल्युएशन बाजार की आक्रामक उम्मीदों को दिखाता है, जो अगर पूरी नहीं हुईं तो स्टॉक में बड़ी गिरावट ला सकती है। Manappuram Finance के सामने Muthoot Finance जैसी बड़ी कंपनी से एक स्ट्रक्चरल डिसएडवांटेज है, जिसे स्केल और कम फंडिंग कॉस्ट का फायदा मिलता है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी के नेट प्रॉफिट में 17.51% की गिरावट इस बात का संकेत देती है कि Q4 का टर्नअराउंड एक तिमाही का सुधार हो सकता है।
फ्यूचर ग्रोथ के लिए मार्जिन मैनेजमेंट जरूरी
Manappuram Finance मैनेजमेंट का प्लान है कि वह FY27 तक गोल्ड लोन की रफ्तार और ब्रांच विस्तार (500-550 नई ब्रांच) के जरिए ग्रोथ बनाए रखे। पार्टनरशिप और को-लेंडिंग जैसे कदम भी मार्केट रीच बढ़ाने के लिए उठाए जाएंगे। हालांकि, कंपनी की एंबिशियस एक्सपेंशन को प्रॉफिटेबल ग्रोथ में बदलने की क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह मार्जिन प्रेशर और कॉम्पिटिटिव मार्केट को कितनी अच्छी तरह मैनेज कर पाती है।
एनालिस्ट्स की राय भी सतर्क बनी हुई है। Motilal Oswal Financial Services ने 'न्यूट्रल' रेटिंग और ₹315 का टारगेट प्राइस दिया है, जो स्टॉक में तत्काल बड़े उछाल की उम्मीद कम दिखाता है।
