नतीजों पर सोने की कीमतों का असर
Manappuram Finance के शेयर में हाल ही में गिरावट देखी गई, जो 6% से भी ज़्यादा रही। इसकी मुख्य वजहें तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजे और खासतौर पर सोने की कीमतों में आई बड़ी उथल-पुथल रहीं। इससे पहले 30 जनवरी, 2026 को भी शेयर 9% से ज़्यादा टूटा था। कंपनी का मार्केट कैप फरवरी 2026 की शुरुआत में लगभग ₹22.6 से ₹24.1 अरब के बीच था।
Q3 FY26 में कैसा रहा प्रदर्शन?
वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में, Manappuram Finance ने ₹2.4 अरब का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 14% कम है। इसी दौरान, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी लगभग 18% गिरकर करीब ₹13 अरब पर आ गई। हालांकि, प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPoP) अनुमान से करीब 5% ज़्यादा रहा, पर यह 29% की बड़ी गिरावट के साथ ₹6.6 अरब पर रहा। ऑपरेटिंग खर्चे 7% बढ़कर ₹7.6 अरब हो गए, जिसमें नए लेबर कोड से जुड़े ₹19 मिलियन के एकमुश्त प्रोविजन शामिल थे। क्रेडिट कॉस्ट की बात करें तो यह लगभग ₹3.5 अरब रही, जो अनुमानित ₹2.9 अरब से ज़्यादा थी। हालांकि, सालाना क्रेडिट कॉस्ट सीक्वेंशियली सुधरकर 2.9% पर आ गई।
सेक्टर में चुनौतियां और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
गोल्ड लोन सेक्टर, जिसे FY2026 तक ₹15 लाख करोड़ के ऑर्गेनाइज्ड मार्केट AUM तक पहुंचने का अनुमान है, कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उम्मीद है कि एनबीएफसी (NBFC) गोल्ड लोन एयूएम (AUM) में मौजूदा वित्त वर्ष से FY27 तक सालाना करीब 40% की दर से बढ़ोतरी होगी और यह मार्च 2027 तक ₹4 लाख करोड़ के पार निकल जाएगा। लेकिन, हाल ही में ग्लोबल और घरेलू स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट एक बड़ा जोखिम पैदा कर रही है। इस अस्थिरता से गोल्ड लोन फाइनेंसर्स के लिए नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) बढ़ सकते हैं और लोन देने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। अगर बुलियन कीमतों में लगातार गिरावट आती है, तो कर्जदाताओं को समान मात्रा में सोने के बदले कम लोन देना पड़ सकता है, जिससे डिस्बर्समेंट धीमा हो सकता है और मार्जिन की जरूरतें पूरी न होने पर एनपीए (NPA) बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा, बैंकों की ओर से गोल्ड लोन सेगमेंट में बढ़ती मौजूदगी से प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है। मार्च 2025 तक कुल गोल्ड लोन में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 49.7% हो गई, जबकि एनबीएफसी (NBFC) की हिस्सेदारी घटकर 50.3% रह गई। बैंकों के फंड की कम लागत और बड़े नेटवर्क की वजह से यह बदलाव आया है। Manappuram Finance के मुख्य प्रतिद्वंद्वी, Muthoot Finance के शेयर में भी सोने की कीमतों में गिरावट के बीच नरमी देखी गई।
Motilal Oswal की राय
आगे देखते हुए, Motilal Oswal का अनुमान है कि Manappuram Finance का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वित्त वर्ष 2025 से 2028 के बीच सालाना लगभग 40% की दर से बढ़ेगा। इस ग्रोथ में सोने की बढ़ती कीमतों और कंपनी की अपने पीयर्स (Peers) के साथ लेंडिंग रेट्स को अलाइन करने की रणनीति का सहयोग मिलेगा। इन ग्रोथ संभावनाओं के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म ने शेयर पर न्यूट्रल (Neutral) रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस ₹330 तय किया गया है, जो दिसंबर 2027 के अनुमानित कंसोलिडेटेड बुक वैल्यू प्रति शेयर (BVPS) के 1.6 गुना के वैल्यूएशन मल्टीपल पर आधारित है। यह वैल्यूएशन, मौजूदा प्रॉफिटेबिलिटी दबावों और मार्केट वोलेटिलिटी के बीच कंपनी की विस्तार क्षमता को ध्यान में रखता है।