Manappuram Finance ने अपनी मैनेजमेंट टीम को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने चार वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है, जिनका मकसद हाउसिंग फाइनेंस, टेक्नोलॉजी, टैक्सेशन और फाइनेंशियल प्लानिंग जैसे अहम विभागों को और मजबूत करना है।
हाउसिंग फाइनेंस को मिलेगी नई उड़ान
कंपनी अपने हाउसिंग फाइनेंस कारोबार को पंख लगाने की तैयारी में है। इसके तहत Rakesh Sharma को Manappuram Home Finance का Co-CEO नियुक्त किया गया है। Sharma के पास Cent Bank Home Finance और Tyger Housing जैसे संस्थानों का अनुभव है, और वे अफोर्डेबल हाउसिंग (सस्ते घर) के ऑपरेशंस और रिस्क मैनेजमेंट का नेतृत्व करेंगे। भारत का हाउसिंग फाइनेंस मार्केट, जिसका आकार $360 बिलियन है, तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें एनपीए (NPA) और एलटीवी (LTV) नियमों में बदलाव जैसे जोखिम भी हैं।
टेक्नोलॉजी, टैक्स और फाइनेंस में मजबूती
सिर्फ हाउसिंग फाइनेंस ही नहीं, Manappuram Finance अपनी कोर ऑपरेशंस और कंप्लायंस (नियम पालन) को भी अपग्रेड कर रही है। Easwaran Narayanan को ग्रुप चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) बनाया गया है, जो कंपनी की डिजिटल स्ट्रैटेजी और स्केलेबल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को लीड करेंगे। NBFCs के लिए टेक्नोलॉजी का बढ़ता महत्व देखते हुए यह कदम अहम है। Surendra K Nayar, जिन्हें टैक्स के क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है, अब टैक्सेशन विभाग संभालेंगे और कंपनी को जटिल टैक्स कानूनों से निपटने में मदद करेंगे। वहीं, Manish Mohan फाइनेंशियल प्लानिंग एंड एनालिसिस (FP&A) के हेड होंगे, जो वित्तीय अनुशासन और रिसोर्स मैनेजमेंट पर ध्यान देंगे। इन नियुक्तियों का लक्ष्य गवर्नेंस को बेहतर बनाना भी है, जिस पर RBI जैसे रेगुलेटर्स की भी कड़ी नजर रहती है।
नए NBFC नियमों के लिए तैयारी
ये बड़े फेरबदल ऐसे समय में हुए हैं जब भारतीय NBFCs को 1 अप्रैल, 2026 से RBI के नए नियमों का सामना करना पड़ेगा। इन नियमों में 'अनरजिस्टर्ड टाइप I' NBFCs की नई कैटेगरी और को-लेंडिंग (सह-ऋण) नियमों को और मजबूत करना शामिल है। Manappuram Finance, जो डिपॉजिट नहीं लेती, ऐसी NBFCs के लिए इन नियमों के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ना, खासकर अपने हाउसिंग फाइनेंस यूनिट में, एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है, और Q4 FY26 के अंत तक इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) 21.3% था। इसके बावजूद, इसे बैंकों और अन्य हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
जोखिम और विश्लेषकों की चिंताएं
इन नई नियुक्तियों के बावजूद, कुछ जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है। हाल ही में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर V. P. Nandakumar को SEBI से शेयर गिरवी रखने की जानकारी देर से देने पर चेतावनी मिली थी। Manappuram Finance का कहना है कि इसका कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन ऐसी चेतावनियां रेगुलेटरी जांच बढ़ा सकती हैं। NBFC सेक्टर खुद भी मार्जिन कम होने जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, जो Manappuram Finance के Q4 FY26 में फ्लैट नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भी दिखा। कंपनी का गोल्ड लोन बिजनेस मजबूत है, लेकिन माइक्रोफाइनेंस से रेवेन्यू में गिरावट परिचालन संबंधी जोखिमों का संकेत देती है। विश्लेषकों ने कम इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो, पिछले 5 वर्षों में 8.48% की धीमी सेल्स ग्रोथ और कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) जैसी चिंताओं को भी उजागर किया है। कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा गोल्ड लोन पर निर्भर करता है, जो सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रतिस्पर्धा से प्रभावित हो सकता है।
विश्लेषकों की राय और भविष्य की योजनाएं
विश्लेषकों की राय Manappuram Finance के भविष्य को लेकर मिली-जुली है। कुछ, जैसे Jefferies, ने स्टॉक को 'Buy' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹360 रखा है, उन्हें उम्मीद है कि NIMs (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) स्थिर होने और प्रोविजन्स (प्रावधान) कम होने से सुधार आएगा। वहीं, कुछ विश्लेषक अभी भी सतर्क हैं। अगले 12 महीनों के लिए Manappuram Finance के औसत टारगेट प्राइस ₹302.93 से लेकर ₹451.10 तक हैं। कंपनी ने Q4 FY26 में ₹404 करोड़ का दमदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जिसका मुख्य कारण गोल्ड लोन रहा, और ₹0.50 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) भी घोषित किया था। Manappuram को FY27 में भी ग्रोथ बनाए रखने की उम्मीद है, जिसे ब्रांच विस्तार के आसान नियमों से मदद मिल सकती है। कंपनी 500-550 नई गोल्ड लोन ब्रांचें खोलने की योजना बना रही है। इन नई नियुक्तियों की सफलता ही कंपनी को इस जटिल बाजार और रेगुलेटरी माहौल में आगे बढ़ने और विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगी।
