मालदीव ने State Bank of India (SBI) की **$15 करोड़** (150 मिलियन डॉलर) की ट्रेजरी बिल सुविधा का भुगतान कर दिया है। मूल राशि तो चुका दी गई है, लेकिन भारत का **$35 करोड़** (350 मिलियन डॉलर) का सॉवरेन बॉन्ड एक्सपोजर और **₹3,000 करोड़** की करेंसी स्वैप व्यवस्था अभी भी सक्रिय है।
पेमेंट की पूरी कहानी
मालदीव सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा सब्सक्राइब की गई $15 करोड़ की ट्रेजरी बिल सुविधा को पूरी तरह क्लियर कर दिया है। इस कड़ी का अंतिम $5 करोड़ (50 मिलियन डॉलर) का भुगतान 17 सितंबर, 2026 को किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि यह क्रेडिट अरेंजमेंट साल 2019 से चल रहा था और इसे अब तक 6 बार रिन्यू किया गया था।
भारत सरकार की भूमिका
हालांकि मूल राशि मालदीव ने चुकाई है, लेकिन भारत सरकार ने इसमें बड़ी वित्तीय मदद दी थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस 5 साल की अवधि के दौरान भारत ने ब्याज के करीब $4.5 करोड़ (45 मिलियन डॉलर) का बोझ खुद उठाया। पब्लिक सेक्टर बैंक के निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ऐसे ट्रांजेक्शन अक्सर द्विपक्षीय रणनीतियों के तहत होते हैं, जहां सॉवरेन सपोर्ट के जरिए रिस्क कम किया जाता है।
अभी भी भारत का बड़ा दांव बाकी
ट्रेजरी बिल का यह मुद्दा भले ही सुलझ गया हो, लेकिन दोनों देशों के बीच वित्तीय संबंध अभी भी काफी गहरे हैं:
- करेंसी स्वैप: भारत ने मालदीव को ₹3,000 करोड़ की करेंसी स्वैप सुविधा दे रखी है।
- बॉन्ड होल्डिंग्स: भारत के पास मालदीव के $35 करोड़ के ट्रेजरी बॉन्ड्स हैं, जिनकी मैच्योरिटी 2029 और 2030 में होनी है।
मालदीव का यह कदम अपने राष्ट्रीय कर्ज (National Debt) को मैनेज करने की कोशिश का हिस्सा है, ताकि वे फ्यूल, फूड और दवाओं जैसे जरूरी इंपोर्ट के लिए लिक्विडिटी बनाए रख सकें। निवेशकों के लिए अब नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि मालदीव का शेष $35 करोड़ का कर्ज प्रबंधन कैसा रहता है, जो दोनों देशों के बीच भविष्य के वित्तीय संबंधों की दिशा तय करेगा।
