Mahindra & Mahindra, DBS Bank India की अनोखी पहल: ग्रीन डीलर फाइनेंसिंग प्रोग्राम लॉन्च

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AuthorAditya Rao|Published at:
Mahindra & Mahindra, DBS Bank India की अनोखी पहल: ग्रीन डीलर फाइनेंसिंग प्रोग्राम लॉन्च
Overview

Mahindra & Mahindra और DBS Bank India ने मिलकर एक नया ग्रीन डीलर फाइनेंसिंग प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत, कंपनी के अधिकृत डीलर्स अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन, जैसे उत्सर्जन, पानी की खपत और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री के आधार पर कम ब्याज दरों का लाभ उठाएंगे। यह पहल Scope 3 उत्सर्जन को कम करने और भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों का समर्थन करने पर केंद्रित है।

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डीलर नेटवर्क में आएगी हरियाली!

Mahindra & Mahindra और DBS Bank India, महिंद्रा के ऑटोमोटिव डीलर्स के लिए एक 'सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड' फाइनेंसिंग प्रोग्राम लेकर आए हैं। इस खास स्कीम में, डीलर्स को उनके पर्यावरण-अनुकूल कामों के आधार पर बेहतर ब्याज दरें (Preferential Interest Rates) मिलेंगी। यह ऑटोमोटिव सेक्टर में Scope 3 उत्सर्जन को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कैसे मिलेगा फायदा?

यह प्रोग्राम डीलर्स को ग्रीन प्रैक्टिस अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। उनका मूल्यांकन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, पानी की खपत, रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग, कचरा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बिक्री जैसे पैमानों पर किया जाएगा। इन तय मानकों को पूरा करने और सेल्स टारगेट हासिल करने पर, डीलर्स को व्हीकल इन्वेंटरी के लिए मिलने वाले लोन पर सीधा आर्थिक फायदा होगा।

नेट-जीरो लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम

इस साझेदारी का मकसद महिंद्रा के विशाल डीलर नेटवर्क को कंपनी की डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) रणनीति में शामिल करना है। यह सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय जलवायु उद्देश्यों और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की प्रतिबद्धता में योगदान देगा। यह कदम महिंद्रा के S&P Global Sustainability Yearbook 2026 में शामिल होने के साथ भी जुड़ा है। DBS Bank India की सस्टेनेबल फाइनेंस में मजबूत पकड़ इस प्रोग्राम को भरोसेमंद और बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करेगी।

यह पहल फाइनेंसर्स के लिए ऐसे प्रैक्टिकल टूल्स विकसित करने की जरूरत को पूरा करती है, जो पूरी वैल्यू चेन में डीकार्बोनाइजेशन को सक्षम बनाते हैं, खासकर सीधे कॉर्पोरेट उत्सर्जन से परे जाकर।

भविष्य की राह

हालांकि भारत के ऑटोमोटिव सेक्टर में यह अपनी तरह का पहला प्रोग्राम है, लेकिन ESG-लिंक्ड फाइनेंसिंग का चलन दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। ऑटोमोटिव फाइनेंस स्पेस में कंपटीटर्स भी रेगुलेटरी दबाव और निवेशकों की मांग को पूरा करने के लिए ऐसे ही इनिशिएटिव पर विचार कर रहे हैं। महिंद्रा का यह कदम इसे सप्लाई चेन में पर्यावरण की जिम्मेदारी को बढ़ावा देने में एक लीडर के तौर पर स्थापित करता है।

इस प्रोग्राम की सफलता, मैन्युफैक्चरर्स और वित्तीय संस्थानों के बीच इसी तरह के सहयोग के लिए एक मिसाल कायम कर सकती है, जिससे भारत में और संभावित रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अधिक टिकाऊ ऑटोमोटिव इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा। Scope 3 उत्सर्जन पर ध्यान देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण, लेकिन अक्सर चुनौतीपूर्ण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.