Mahindra & Mahindra Financial Services (Mahindra Finance) ने चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट **70%** बढ़कर **₹899 करोड़** पर पहुंच गया है। इस ग्रोथ का मुख्य कारण एसेट अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management) में **13%** का इजाफा और रिकॉर्ड **₹15,564 करोड़** का डिस्बर्समेंट रहा।
Detailed Coverage
मुनाफे में आई जबरदस्त उछाल
Mahindra Finance ने 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹899 करोड़ का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स दर्ज किया है। कंपनी के एसेट अंडर मैनेजमेंट में 13% की ग्रोथ देखी गई, जो अब बढ़कर ₹1,37,449 करोड़ हो गए हैं। पहली तिमाही में कंपनी का डिस्बर्समेंट 22% बढ़कर ₹15,564 करोड़ रहा, जो अब तक का सबसे ज़्यादा है।
नेट इंटरेस्ट मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट में सुधार
कंपनी के नतीजों को बेहतर बनाने में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin) का 7.3% तक पहुंचना एक बड़ा फैक्टर रहा, जो पिछले साल 6.7% था। इसके अलावा, क्रेडिट कॉस्ट में भी कमी आई है, जो 1.5% पर आ गई, जबकि पिछले साल यह 1.9% थी। इन वजहों से प्री-प्रोविजनिंग ऑपरेटिंग प्रॉफिट 30% बढ़कर ₹1,756 करोड़ हो गया। कंपनी का रिटर्न ऑन एसेट्स (Return on Assets) भी सुधरकर 2.4% पर पहुंच गया, जो पिछले साल 1.6% था।
नॉन-व्हीकल सेगमेंट में विस्तार
हालांकि, व्हीकल फाइनेंस अभी भी कंपनी का मुख्य व्यवसाय है, लेकिन Mahindra Finance अपने नॉन-व्हीकल पोर्टफोलियो का भी तेजी से विस्तार कर रही है। Mahindra Rural Housing Finance सहित इस कैटेगरी के डिस्बर्समेंट में 79% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। वहीं, व्हीकल सेगमेंट में ट्रैक्टर डिस्बर्समेंट 45% और पैसेंजर व्हीकल लोन 24% बढ़े हैं।
एसेट क्वालिटी में स्थिरता
खराब लोन (Stage 3 assets) का आंकड़ा सुधरकर 3.5% पर आ गया है, जो पिछले साल 3.8% था। इसी तरह, स्टेज 2 एसेट्स भी 5.9% से घटकर 4.9% पर आ गए। कंपनी की कलेक्शन एफिशिएंसी 95% बनी हुई है, जो ग्राहकों की तरफ से अच्छी रीपेमेंट को दर्शाता है। कंपनी अपने 'उड़ान' डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम को भी जारी रखे हुए है, जिसका मकसद लेंडिंग और कलेक्शन प्रोसेस को बेहतर बनाना है।
मजबूत कैपिटल पोजीशन
Mahindra Finance की कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Capital Adequacy Ratio) 18.5% पर मजबूत बनी हुई है। कंपनी के पास ₹14,650 करोड़ से ज़्यादा का लिक्विडिटी बफर भी है। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपने नॉन-व्हीकल फाइनेंस बिजनेस को बढ़ाते हुए इन मुनाफे के मार्जिन को बनाए रख पाती है या नहीं। भविष्य में कंपनी की स्ट्रैटेजी एग्जीक्यूशन और रूरल व सेमी-अर्बन मार्केट्स में कॉम्पिटिशन के बीच क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करते हुए लोन बुक को बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
