महाराष्ट्र सरकार ने सख्ती दिखाते हुए चेतावनी दी है कि कर्ज वसूली के लिए दबाव डालने पर अब संस्थाओं और एजेंटों पर हत्या का मामला दर्ज होगा। नांदेड़ में एक किसान की मौत के बाद सरकार का यह कदम Microfinance और NBFCs के लिए बड़े ऑपरेशनल रिस्क पैदा कर सकता है।
महाराष्ट्र सरकार ने अब वित्तीय संस्थानों, विशेषकर माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और प्राइवेट लैंडर्स के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि वसूली के दौरान किसी तरह की प्रताड़ना होती है और उससे किसान आत्महत्या जैसी घटना होती है, तो संबंधित संस्था और एजेंटों पर हत्या या गैर-इरादतन हत्या की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। यह निर्देश नांदेड़ जिले की एक घटना के बाद आया है, जहां एक फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में किसान का शव मिला था, जिसके बाद वसूली की आक्रामक प्रक्रिया पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
ग्रामीण कर्ज देने वाली कंपनियों पर असर
निवेशकों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है। जो NBFCs और Microfinance Institutions ग्रामीण महाराष्ट्र में सक्रिय हैं, वे मुख्य रूप से फील्ड-बेस्ड कलेक्शन मॉडल पर काम करते हैं। अब इस पर सरकार की पैनी नजर है। सख्त नियमों के कारण इन कंपनियों की लोन रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर उनके कलेक्शन एफिशिएंसी (Collection Efficiency) पर पड़ेगा।
सूखे की मार और एसेट क्वालिटी का रिस्क
यह सरकारी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य का कृषि क्षेत्र संकट से जूझ रहा है। 2026 के खरीफ सीजन के बाद राज्य के 358 में से 304 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की इस बदहाली के कारण किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता कम हो गई है, जिससे बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के NPAs बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
राहत के तौर पर सरकार ने पात्र किसानों को ₹5,000 की तत्काल सहायता देने का फैसला किया है। हालांकि, यह कदम केवल एक अस्थायी मरहम है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि NBFCs अपने कलेक्शन के तरीकों में क्या बदलाव लाती हैं और क्या सरकार की इस सख्ती से उनके पोर्टफोलियो की क्वालिटी (Asset Quality) पर बुरा असर पड़ता है या नहीं।
