Madras HC का Tamil Nadu सरकार के फैसले पर सवाल, मंदिर के पैसों का हो रहा गलत इस्तेमाल?

BANKINGFINANCE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Madras HC का Tamil Nadu सरकार के फैसले पर सवाल, मंदिर के पैसों का हो रहा गलत इस्तेमाल?
Overview

मद्रास हाई कोर्ट (Madras HC) तमिलनाडु सरकार के एक ऐसे आदेश पर सवाल उठा रहा है, जिसके तहत मंदिरों के सरप्लस फंड (surplus funds) को सरकारी कंट्रोल वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (NBFCs) में जमा करने की इजाजत दी गई है। कोर्ट को धार्मिक संपत्तियों के दुरुपयोग और वित्तीय जोखिमों का डर सता रहा है। कोर्ट ने कहा कि यह कदम नियमित बैंकिंग को दरकिनार करता है और सरकारी वित्तीयन के लिए मंदिर की संपत्तियों का इस्तेमाल बिना उचित सुरक्षा के किया जा रहा है, खासकर तब जब इन NBFCs की क्रेडिट रेटिंग कम है और वे पहले से ही समस्याओं का सामना कर रही हैं।

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कोर्ट ने मंदिर फंड डायवर्जन ऑर्डर पर उठाए सवाल

मद्रास हाई कोर्ट (Madras HC) तमिलनाडु सरकार के एक ऐसे आदेश की बारीकी से जांच कर रहा है, जो मंदिरों से प्राप्त अतिरिक्त धनराशि को दो सरकारी-प्रबंधित नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) में निवेश करने की अनुमति देता है। एक जनहित याचिका (PIL) में यह तर्क दिया गया है कि यह आदेश धार्मिक न्यासों (religious endowments) को बड़े वित्तीय जोखिम में डालता है और 1959 के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त अधिनियम (Hindu Religious and Charitable Endowments Act) के खिलाफ है। कोर्ट ने सरकार के तर्क पर गंभीर संदेह जताया है और पूछा है कि जब पारंपरिक बैंक उपलब्ध हैं तो इन विशेष NBFCs की क्या आवश्यकता है।

सरकारी NBFCs में वित्तीय जोखिम

यह सरकारी आदेश, जो 17 फरवरी, 2026 से लागू होने वाला है, तमिलनाडु पावर फाइनेंस एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TNPFC) और तमिलनाडु ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TNTDFC) में निवेश की अनुमति देता है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह कदम मंदिर की संपत्तियों को सरकारी पहलों को फंड करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जो मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन के मूल कर्तव्य से हटकर है। TNPFC की जांच में BBB(-) की कम क्रेडिट रेटिंग और लेखांकन अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें गलत जमा वर्गीकरण और बड़ी विवादित कर देनदारियां शामिल हैं। वहीं, TNTDFC पर घाटे वाली राज्य परिवहन कंपनियों को कर्ज केंद्रित करने और अपर्याप्त वित्तीय प्रावधान करने का आरोप है। इस संशोधन में क्रेडिट रेटिंग, जमाकर्ता सुरक्षा उपायों और औपचारिक जोखिम मूल्यांकन जैसे आवश्यक तत्वों की कमी की आलोचना की गई है, जिससे फंड के दुरुपयोग और धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षण के संभावित उल्लंघनों का खतरा बढ़ गया है।

कानूनी चुनौती और कोर्ट के सवाल

याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील रवि सेशद्री ने बताया कि ये NBFCs पहले मंदिर फंड निवेश के लिए अधिकृत नहीं थीं और संशोधन से पहले एक कानूनी नोटिस जारी किया गया था। कोर्ट ने सीधे तौर पर यह सवाल पूछा है कि सरकार ने विशेष रूप से इन NBFCs को क्यों चुना, खासकर TANGEDCO जैसी संस्थाओं के आसपास की वित्तीय चिंताओं को देखते हुए, जो संसाधनों पर संभावित दबाव का संकेत देता है। इन जमाओं के लिए सरकारी गारंटी की अनुपस्थिति और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के संभावित गैर-अनुपालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। लगभग ₹2,700 करोड़ के मंदिर जमाओं के नवीनीकरण (renewal) के कारण, कोर्ट से इन लेनदेन को रोकने का अनुरोध किया गया है। मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित है। राज्य का मंदिर फंड के लिए NBFCs का उपयोग करने का निर्णय, विशेष रूप से ज्ञात वित्तीय कमजोरियों और सीमित निरीक्षण वाले, धार्मिक ट्रस्टों के लिए मानक वित्तीय प्रबंधन प्रथाओं से एक महत्वपूर्ण विचलन है। यह दृष्टिकोण विशिष्ट नियामक अपेक्षाओं से भिन्न है, जो आम तौर पर ऐसे संवेदनशील फंडों के लिए अत्यधिक विनियमित और स्थिर वित्तीय संस्थानों के पक्ष में होती हैं। पर्याप्त वित्तीय नुकसान की संभावना और धार्मिक निहितार्थों को देखते हुए, जवाबदेही सुनिश्चित करने और मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अदालत की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.