HDFC, ICICI Banks: Macquarie ने पकड़ी ये 2 दिग्गज बैंक, सालों बाद दिखा ऐसा मौका!

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AuthorNeha Patil|Published at:
HDFC, ICICI Banks: Macquarie ने पकड़ी ये 2 दिग्गज बैंक, सालों बाद दिखा ऐसा मौका!
Overview

Macquarie ने भारत के बैंकिंग सेक्टर में HDFC Bank और ICICI Bank को अपनी टॉप पिक्स (Top Picks) के रूप में चुना है। फर्म का कहना है कि इन बैंकों के शेयर ऐसे आकर्षक वैल्युएशन (Valuations) पर ट्रेड कर रहे हैं, जो पिछले कई सालों में नहीं देखे गए हैं, ऐसे में निवेशकों के लिए यह एक अच्छा मौका हो सकता है।

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आकर्षक वैल्युएशन का दम

Macquarie के एनालिस्ट्स (Analysts) ने HDFC Bank और ICICI Bank को भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अपनी पहली पसंद बताया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सेक्टर को जल्द ही प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर बड़े दबाव का सामना करना पड़ सकता है। फर्म ने खासकर स्टॉक की कीमतों को काफी आकर्षक बताया है। HDFC Bank अपने बुक वैल्यू (Book Value) के 1.87 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो कि 10 साल से भी अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। वहीं, ICICI Bank 2.7 गुना बुक वैल्यू पर है, जो कि 2022 की शुरुआत से सबसे कम है।

अन्य पिक्स और PSU बैंकों पर जोखिम

Macquarie के फाइनेंशियल रिसर्च हेड, सुरेश गणेशन (Suresh Ganapathy) ने कहा कि ये आकर्षक स्टॉक प्राइस ही HDFC और ICICI को चुनने का मुख्य कारण हैं। Macquarie ने HDFC Life और SBI Life इंश्योरेंस कंपनियों को भी इसी तरह के वैल्युएशन कारणों से पसंद किया है। हालांकि, गणेशन ने चेताया है कि पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) बैंकों में लोन ग्रोथ (Loan Growth) धीमी रह सकती है। इसका कारण डिपॉजिट (Deposit) जुटाने में आने वाली दिक्कतें हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक हालातों के आधार पर एसेट क्वालिटी (Asset Quality) से जुड़े जोखिम भी सामने आ सकते हैं, जिससे इन सरकारी बैंकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

डिपॉजिट की कमी से मार्जिन पर दबाव

बैंकों को एक लगातार समस्या का सामना करना पड़ रहा है: डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) का धीमा होना। सस्ते करेंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) डिपॉजिट्स की कमी है। इसके चलते बैंकों को लिक्विडिटी (Liquidity) की जरूरतों को पूरा करने के लिए मार्केट से ऊंचे ब्याज दरों पर पैसा उधार लेना पड़ रहा है। इस उधारी से लागत बढ़ जाती है और प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव आता है। गणेशन का अनुमान है कि ज्यादातर बैंकों को मार्जिन के मामले में एक मुश्किल दौर का सामना करना पड़ेगा, और आंकड़े या तो स्थिर (Flat) रहेंगे या थोड़े कम होंगे।

2026 की शुरुआत में कैसा रहेगा माहौल?

2025-26 के फाइनेंशियल ईयर की जनवरी-मार्च तिमाही के लिए, भारतीय बैंकिंग सेक्टर मुनाफे (Profits) और मार्जिन (Margins) दोनों पर दबाव के लिए तैयार है। इन मुश्किलों के बावजूद, Macquarie की रिसर्च बताती है कि बड़े प्राइवेट बैंकों के वैल्युएशन आकर्षक बने रहेंगे। वहीं, पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSU Banks) के चौथी तिमाही के नतीजे कमजोर रहने की संभावना है। इसके पीछे ट्रेजरी लॉसेस (Treasury Losses) और टाइट लिक्विडिटी (Tight Liquidity) जैसे कारण होंगे, जो उनके ऑपरेशनल विकल्पों को सीमित करेंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.