मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पोस्ट ऑफिस को आदेश दिया है कि वह बीना ब्रांच में हुए **₹36.4 लाख** के फ्रॉड के शिकार ग्राहकों का पैसा वापस करे। कोर्ट ने विभाग की इस दलील को खारिज कर दिया कि ग्राहक जिम्मेदार हैं, और विभाग को ही जवाबदेह माना है। पीड़ितों को **30 दिन** के भीतर दावा पेश करना होगा।
विभाग की दलीलें और कोर्ट का कड़ा रुख
इस मामले में पोस्ट ऑफिस ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि ग्राहकों ने अपनी तरफ से सावधानी नहीं बरती और कर्मचारियों की पहचान की पुष्टि नहीं की। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह नकार दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि आम नागरिक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर रिकॉर्ड की जांच-पड़ताल करे। चूंकि यह पूरा फ्रॉड सरकारी दफ्तर के अंदर हुआ, इसलिए इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से विभाग की है।
क्या था पूरा मामला?
बीना पोस्ट ऑफिस में कुछ पूर्व कर्मचारी, जिनका ट्रांसफर हो चुका था, फिर भी ऑफिस के अंदर सक्रिय थे। इन लोगों ने खुद को असली स्टाफ बताकर ग्राहकों को फर्जी National Savings Certificates (NSCs) और टर्म डिपॉजिट रसीदें थमा दीं। इस धोखाधड़ी में कुल ₹36.4 लाख की चपत लगी थी।
अब आगे क्या होगा?
कोर्ट ने मई 2021 के विभागीय सर्कुलर का हवाला देते हुए एक सख्त समय-सीमा तय की है:
- दावा पेश करना: पीड़ितों को 30 वर्किंग डेज के अंदर अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स सक्षम अधिकारी के पास जमा करने होंगे।
- पेमेंट का समय: आवेदन जमा होने के बाद, विभाग को 90 दिनों के भीतर ब्याज समेत पैसा वापस करना होगा।
यह फैसला उन सभी निवेशकों के लिए एक नजीर है जो सरकारी संस्थानों में पैसे जमा करते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी सरकारी दफ्तर के परिसर में होने वाली गलतियों के लिए संस्थान खुद जिम्मेदार होगा, ग्राहक नहीं।
