HDFC Bank, ICICI Bank: MFs की बड़ी चाल! प्राइवेट बैंकों में लगाया ₹18,400 करोड़ का दांव, जानें वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
HDFC Bank, ICICI Bank: MFs की बड़ी चाल! प्राइवेट बैंकों में लगाया ₹18,400 करोड़ का दांव, जानें वजह
Overview

जनवरी के महीने में म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) ने प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंकों में अपना निवेश काफी बढ़ाया है। HDFC Bank और ICICI Bank में करीब **₹15,400 करोड़**, तो Kotak Mahindra Bank में लगभग **₹3,000 करोड़** लगाए गए। यह कुल इक्विटी खरीद का **45%** था, जो अंडरपरफॉर्मेंस के बाद आकर्षक वैल्यूएशन पर दांव लगाने का संकेत देता है।

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जनवरी में फंड मैनेजर्स ने प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंकों की ओर एक रणनीतिक कदम उठाया है। HDFC Bank और ICICI Bank ने मिलकर करीब ₹15,400 करोड़ का निवेश आकर्षित किया, जबकि Kotak Mahindra Bank को लगभग ₹3,000 करोड़ मिले। यह निवेश उस महीने म्यूचुअल फंड्स द्वारा किए गए कुल ₹40,514 करोड़ की इक्विटी खरीद का 45% था, जो फंड मैनेजर्स का इन फाइनेंशियल कंपनियों के भविष्य को लेकर मजबूत विश्वास दर्शाता है। यह खरीदारी ऐसे समय में हुई जब पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) की तुलना में प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन में कुछ समय से नरमी देखी जा रही थी, जिससे यह एक आकर्षक एंट्री पॉइंट बन गया।

परफॉरमेंस के समीकरणों और वैल्यूएशन की चिंताओं को देखें तो, फरवरी 2026 की शुरुआत में HDFC Bank का P/E रेश्यो लगभग 19.50 था। ICICI Bank का P/E रेश्यो फरवरी 2026 के मध्य में करीब 17.95 था, और इसकी मार्केट कैप लगभग ₹10,12,108.9 करोड़ थी। Kotak Mahindra Bank का P/E रेश्यो फरवरी 2026 के मध्य में करीब 22.40 था, जिसकी मार्केट कैप ₹418,648.2 करोड़ थी। हालांकि ये आंकड़े अलग-अलग वैल्यूएशन स्तरों को दर्शाते हैं, जनवरी 2026 में एनालिस्ट्स की राय इन बैंकिंग दिग्गजों पर 'होल्ड' (Hold) की ओर झुकी थी। उदाहरण के लिए, ICICI Bank का 20.58 का P/E रेश्यो महंगा माना जा रहा था, लेकिन इसका PEG रेश्यो 1.79 ग्रोथ के हिसाब से इसे साथियों से बेहतर दिखा रहा था। Kotak Mahindra Bank भी 3.4 के P/B रेश्यो के साथ महंगा लग रहा था।

वहीं, पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) ने भी हैरान करने वाली मजबूती दिखाई है। FY25 में PSBs के एडवांसेस (Advances) में 12.2% की डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई, जो प्राइवेट सेक्टर बैंकों (PVBs) की 9.5% ग्रोथ से कहीं बेहतर है। इसके अलावा, PSBs ने अपनी डिपॉजिट मार्केट शेयर (Deposit Market Share) को बनाए रखा है, और उनके कुल डिपॉजिट्स में घरेलू डिपॉजिट्स का हिस्सा प्राइवेट बैंकों से ज्यादा है। जबकि प्राइवेट बैंक ऐतिहासिक रूप से टेक्नोलॉजी और कस्टमर सर्विस में आगे रहे हैं, हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि PSBs और PVBs के बीच एसेट क्वालिटी (Asset Quality) का अंतर कम हुआ है, और PSBs टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं।

एनालिस्ट्स का नज़रिया और मंदी का परिदृश्य (Bear Case) भी महत्वपूर्ण है। जनवरी 2026 में HDFC Bank पर एनालिस्ट्स की आम राय 'होल्ड' (Hold) थी, जिनके प्राइस टारगेट्स में मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद थी। JPMorgan ने HDFC Bank पर ₹1,090-₹1,125 के टारगेट प्राइस के साथ 'होल्ड' रेटिंग बरकरार रखी थी। इसी तरह, ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank पर भी एनालिस्ट्स की 'होल्ड' रेटिंग थी, जो सावधानी का संकेत देती है। मंदी के परिप्रेक्ष्य से देखें तो, चुनिंदा बड़े बैंकों में इतना बड़ा निवेश एक 'क्राउडेड ट्रेड' (Crowded Trade) का संकेत हो सकता है, जो भविष्य में बड़ी तेजी को सीमित कर सकता है। साथ ही, PSBs की मजबूत एडवांस्ड ग्रोथ और डिपॉजिट रिटेंशन (Deposit Retention) प्राइवेट बैंकों के लिए सीधा कॉम्पिटिटिव थ्रेट (Competitive Threat) है, जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन्स (NIMs) पर दबाव पड़ सकता है। Kotak Mahindra Bank के हालिया 1:5 स्टॉक स्प्लिट (Stock Split), जो 14 जनवरी, 2026 से प्रभावी हुआ, ने एफोर्डेबिलिटी और लिक्विडिटी को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह इसके फंडामेंटल वैल्यूएशन को नहीं बदलता, जो कुछ निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसके अलावा, जबकि प्राइवेट बैंकों ने ऐतिहासिक रूप से लाभप्रदता में बढ़त बनाई है, हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि H2FY26 में PSBs मार्जिन दबाव में कमी और कम क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो के कारण लाभ वृद्धि में आगे रह सकते हैं, जबकि PVBs फ्लैट इंटरेस्ट इनकम और उच्च प्रोविजनिंग का सामना कर रहे हैं। डिपॉजिट्स और एडवांसेस दोनों के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा, साथ ही कुछ प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स के संभावित स्ट्रेच्ड वैल्यूएशन्स, एक ऐसा जोखिम पेश करते हैं जिसे शायद इन MFs की खरीदारी की लहर ने नज़रअंदाज़ कर दिया हो।

भविष्य के नज़रिया की बात करें तो, बैंकिंग सेक्टर फंड मैनेजर्स के लिए फोकस में रहने की उम्मीद है, जिसमें पब्लिक और प्राइवेट एंटिटीज के बीच बदलाव जारी रहेंगे। जबकि वर्तमान रुझान प्राइवेट बैंकों के पक्ष में मजबूत प्राथमिकता दिखाता है, PSBs के प्रदर्शन, विकसित हो रहे रेगुलेटरी माहौल और विभिन्न वैल्यूएशन मेट्रिक्स से तय होने वाला कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप भविष्य के सेक्टर एलोकेशन को तय करेगा। ब्रोकरेज फर्म्स फाइनेंशियल सेक्टर के लिए सतर्क आशावाद (Cautious Optimism) दिखा रही हैं, जिसमें स्पेसिफिक रिकमेंडेशन्स (Specific Recommendations) व्यक्तिगत बैंकों की प्रतिस्पर्धा से निपटने और अर्निंग्स ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेंगे।

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