MAS Financial Services ने भविष्य के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी 'विजन 2036' पेश किया है। इस योजना के तहत, कंपनी का लक्ष्य अगले 12 सालों में यानी 2036 तक ₹1 लाख करोड़ के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के आंकड़े को छूना है। यह एक बड़ा कदम होगा, क्योंकि यह मौजूदा AUM का लगभग सात गुना है। इस आक्रामक ग्रोथ को हासिल करने के लिए MAS Financial सालाना 20% से 25% तक की AUM ग्रोथ का अनुमान लगा रही है।
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साधने के लिए, कंपनी अपनी स्ट्रैटेजी में एक अहम बदलाव ला रही है। अब MAS Financial डायरेक्ट सोर्सिंग पर अपना फोकस बढ़ा रही है, जो उसके कुल AUM सोर्सिंग का 65% हो गया है। यह तीन साल पहले केवल 50% हुआ करता था। इस बदलाव को मजबूत करने के लिए, कंपनी ने पिछले तीन सालों में अपने ब्रांच नेटवर्क को दोगुना करके 210 तक पहुंचा दिया है। माइक्रो-एंटरप्राइज लोंस (MEL) अभी भी कंपनी के बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा बने हुए हैं, जो बैलेंस शीट के आधे से ज्यादा हिस्से पर काबिज हैं।
इस स्ट्रैटेजी का सीधा मतलब है कंपनी का विस्तार करने का मजबूत इरादा और ऑपरेशनल फोकस में बदलाव। डायरेक्ट सोर्सिंग पर बढ़ता जोर, ब्रांच नेटवर्क के विस्तार के कारण ऑपरेटिंग एक्सपेंस में थोड़ी बढ़ोतरी ला सकता है, लेकिन कंपनी को उम्मीद है कि इससे लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी और ग्राहकों की कंपनी के साथ मजबूत जुड़ाव (customer 'stickiness') बढ़ेगा। MAS Financial ने साफ तौर पर प्रॉफिटेबिलिटी के लक्ष्य भी तय किए हैं। कंपनी का लक्ष्य 'विजन 2036' के दौरान 2.75% से 3.00% का रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) और 15% से 17% का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) हासिल करना है।
इसके साथ ही, कंपनी अपनी कैपिटल एफिशिएंसी को बनाए रखने के लिए 20% से 25% AUM को डायरेक्ट असाइनमेंट और को-लेंडिंग जैसे माध्यमों से ऑफ-बुक रखने की योजना बना रही है। MAS Financial अपनी हाउसिंग फाइनेंस सब्सिडियरी के विकास को लेकर भी उत्साहित है, जिसका लक्ष्य 30-35% सालाना ग्रोथ है। इतना ही नहीं, कंपनी अगले पांच सालों में इस सब्सिडियरी को स्टॉक मार्केट में लिस्ट (IPO) करने की संभावना भी तलाश रही है, जिससे वैल्यू अनलॉक हो सके।
MAS Financial को फाइनेंसियल सर्विसेज सेक्टर में 30 साल से अधिक का अनुभव है और कंपनी ने अपनी कैपिटल ग्रोथ का 66% तक हिस्सा खुद के इंटरनल एक्रुअल्स (आंतरिक बचत) से फंड किया है, जो इसके मजबूत बिज़नेस मॉडल को दर्शाता है।
हालांकि, कंपनी ने कुछ संभावित जोखिमों को भी रेखांकित किया है। मैनेजमेंट ने छोटे उधारकर्ताओं के बीच 'ओवरलिवरेजिंग' (अत्यधिक कर्ज लेना) को एक वर्तमान बाजार चुनौती के रूप में पहचाना है।
