M1xchange: बजट 2026 के बूते दिखेगा बड़ा उछाल, SMEs को मिलेगी ₹1.75 लाख करोड़ की फंडिंग

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
M1xchange: बजट 2026 के बूते दिखेगा बड़ा उछाल, SMEs को मिलेगी ₹1.75 लाख करोड़ की फंडिंग
Overview

M1xchange ने अगले फाइनेंशियल ईयर में इनवॉइस डिस्काउंटिंग वॉल्यूम में **40%** की भारी वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो **₹1.75 लाख करोड़** तक पहुंच सकता है। यह तेजी यूनियन बजट 2026 के उस फैसले के कारण है, जिसमें सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) के लिए Trade Receivables Discounting System (TReDS) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है और इसे Government e-Marketplace (GeM) के साथ इंटीग्रेट किया जा रहा है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को बड़ी राहत मिलेगी।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

बजट 2026 का बड़ा दांव: M1xchange को मिलेगी ₹1.75 लाख करोड़ की रफ्तार

Union Budget 2026 ने भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए फाइनेंसिंग के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर ली है। M1xchange, जो कि एक प्रमुख TReDS प्लेटफॉर्म है, को उम्मीद है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में इसके जरिए होने वाले इनवॉइस डिस्काउंटिंग का वॉल्यूम बढ़कर कम से कम ₹1.75 लाख करोड़ हो जाएगा। यह मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के अनुमानित ₹1.25-₹1.30 लाख करोड़ की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल है।

TReDS की अनिवार्यता और GeM इंटीग्रेशन: SMEs के लिए गेम चेंजर

इस बड़ी तेजी के पीछे का सबसे बड़ा कारण यूनियन बजट 2026 में किए गए बड़े ऐलान हैं। सरकार ने सभी सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) के लिए अपने Micro, Small, and Medium Enterprises (MSME) सप्लायर्स के पेमेंट सेटल करने हेतु Trade Receivables Discounting System (TReDS) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। पहले TReDS को लेकर जागरूकता और इसके वॉलंटरी इस्तेमाल ने इसकी पहुंच सीमित रखी थी, लेकिन अब CPSEs और उनके विशाल सप्लायर बेस के प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड होने के कारण, यह व्यवस्था SMEs के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। TReDS को अनिवार्य बनाने से SMEs के एक बड़े इकोसिस्टम को अर्ली पेमेंट डिस्काउंटिंग फैसिलिटीज का सीधा एक्सेस मिलेगा, जिससे पेमेंट साइकिल्स की देरी खत्म होगी। अब विक्रेता नाममात्र की डिस्काउंटिंग फीस देकर तुरंत कैश फ्लो प्राप्त कर सकेंगे, जो पहले केवल चुनिंदा लोगों के लिए ही उपलब्ध था।

इसके अलावा, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) को TReDS प्लेटफॉर्म्स के साथ इंटीग्रेट करने की योजना इस असर को और बढ़ाएगी। सरकारी खरीद का एक बड़ा हिस्सा GeM के जरिए होता है। GeM-अप्रूव्ड इनवॉइस को सीधे TReDS के जरिए रूट करने की सुविधा से, सरकारी खरीद पोर्टल पर बेचने वाले विक्रेताओं को इनवॉइस डिस्काउंटिंग का अभूतपूर्व एक्सेस मिलेगा, जिससे SMEs के लिए लिक्विडिटी और तेज होगी। यह दोहरी नीति – CPSEs के लिए अनिवार्य सेटलमेंट और GeM इंटीग्रेशन – इनवॉइस डिस्काउंटिंग को एक खास फाइनेंसिंग टूल से सरकारी खरीद पेमेंट्स के एक सिस्टमैटिक कंपोनेंट में बदल देगी।

सेक्टर का विस्तार और M1xchange की स्थिति

RBI-रेगुलेटेड TReDS प्लेटफॉर्म M1xchange, जिसने फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹78,000 करोड़ से अधिक का थ्रूपुट फैसिलिटेट किया है, इस नई नीति से सीधे तौर पर लाभान्वित होगा। हालांकि, पूरा TReDS सेक्टर तेजी से फैल रहा है। TReDS सिस्टम ने अपनी शुरुआत से अब तक कुल मिलाकर ₹7 लाख करोड़ से अधिक के फाइनेंसिंग की सुविधा दी है। मौजूदा TReDS मार्केट वॉल्यूम का अनुमान लगभग $4 बिलियन (करीब ₹33,000 करोड़) है, और इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह $60 बिलियन (करीब ₹5 लाख करोड़) तक के ट्रांजैक्शन को अनलॉक कर सकता है। RXIL जैसे कॉम्पिटिटर्स ने भी जबरदस्त ग्रोथ देखी है, जो जुलाई 2025 तक ₹2,00,000 करोड़ से अधिक की क्यूमुलेटिव इनवॉइस फाइनेंसिंग पार कर चुका है। बजट के ये कदम पूरे सेक्टर की ग्रोथ को और तेज करेंगे।

क्रेडिट गारंटी सपोर्ट (CGTMSE के जरिए) और TReDS रिसीवेबल्स को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के तौर पर स्ट्रक्चर करने जैसी पहलों से मार्केट का रिस्क और कम होगा। इससे अधिक इंस्टीट्यूशनल कैपिटल आकर्षित होने और MSMEs के लिए फाइनेंसिंग कॉस्ट कम होने की उम्मीद है, जो वर्तमान में इन प्लेटफॉर्म्स पर सालाना लगभग 7% से 11% के बीच है।

भविष्य की राह: SME सशक्तिकरण पर सरकार का जोर

Union Budget 2026 का MSME लिक्विडिटी को मजबूत करने का यह व्यापक तरीका, जिसमें ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड और क्रेडिट गारंटी मैकेनिज्म शामिल हैं, इस महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। CPSEs के लिए TReDS की अनिवार्यता और GeM इंटीग्रेशन विशेष रूप से परिवर्तनकारी हैं। ये पहलें सिर्फ ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ाने के बारे में नहीं हैं; ये SME पेमेंट और फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की एक फंडामेंटल री-आर्किटेक्चरिंग का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसका लक्ष्य सेक्टर में फिलहाल ₹8.1 लाख करोड़ के डिलेड पेमेंट्स में फंसे फंड को कम करना है। M1xchange और इसके साथियों के लिए, यह तेजी से एडॉप्शन और ऑपरेशनल स्केल-अप का दौर है, जो इनवॉइस डिस्काउंटिंग को भारतीय व्यवसायों के लिए एक मेनस्ट्रीम वर्किंग कैपिटल सॉल्यूशन के रूप में स्थापित करेगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.