Loan Against Shares: RBI के नए नियम और निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Loan Against Shares: RBI के नए नियम और निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क

शेयरों के बदले लोन (Loan Against Shares) लेना अब और सतर्क रहने का काम है। 1 जुलाई 2026 से लागू हुए नए RBI नियमों में अब ₹1 करोड़ की लिमिट और LTV कैप तय कर दी गई है, जिससे बाजार में गिरावट के दौरान मार्जिन कॉल और फोर्स लिक्विडेशन का खतरा बढ़ गया है।

शेयरों के बदले लोन लेना उन निवेशकों के लिए एक जरिया है जो अपनी होल्डिंग्स बेचे बिना नकदी जुटाना चाहते हैं। लेकिन, अब यह व्यवस्था पहले से कहीं अधिक कड़े दायरे में आ गई है। 1 जुलाई 2026 से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस क्षेत्र में अनुशासन लाने के लिए नए नियम लागू किए हैं।

RBI के नए फ्रेमवर्क का असर

केंद्रीय बैंक ने व्यक्तिगत उधारकर्ता के लिए एक्सपोजर की सीमा ₹1 करोड़ तय कर दी है। इसका मकसद जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने से रोकना है। साथ ही, लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो का मानकीकरण किया गया है। लिस्टेड शेयरों पर अब LTV की सीमा 60% है, यानी अगर आपके पास ₹10 लाख के शेयर हैं, तो आप अधिकतम ₹6 लाख तक का ही लोन ले पाएंगे। इक्विटी म्यूचुअल फंड, REITs और InvITs के लिए यह सीमा 75% है, जबकि डेट म्यूचुअल फंड और हाई-रेटेड बॉन्ड पर 85% तक लोन लिया जा सकता है। वहीं, शेयर बाजार या IPO में निवेश के लिए लिए जाने वाले लोन पर ₹25 लाख की सख्त सीमा तय की गई है।

मार्जिन कॉल और फोर्स लिक्विडेशन का गणित

इस लोन का सबसे बड़ा खतरा बाजार की अस्थिरता है। अगर बाजार तेजी से गिरता है, तो आपके गिरवी रखे शेयरों की वैल्यू कम हो जाएगी, जिससे LTV 60% के ऊपर निकल सकता है। ऐसी स्थिति में लेंडर 'मार्जिन कॉल' जारी करता है। आपको 7 कार्य दिवसों के भीतर या तो और शेयर गिरवी रखने होंगे या लोन का हिस्सा चुकाना होगा। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो लेंडर के पास आपके शेयरों को बाजार में बेचकर (Force Liquidation) अपना पैसा वसूलने का कानूनी अधिकार होगा।

टैक्स और वित्तीय पेच

शेयर गिरवी रखने पर फिलहाल कोई कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता है, लेकिन अगर डिफॉल्ट होने पर लेंडर आपके शेयर बेच देता है, तो इसे टैक्सेबल एसेट ट्रांसफर माना जाएगा। इसका मतलब है कि आपको अप्रत्याशित टैक्स देनदारी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, अगर शेयर बेचने के बाद भी लोन की राशि पूरी नहीं होती, तो बकाया रकम की जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी। इसलिए, बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अपने LTV बफर पर नजर रखना और पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.