अगर आपको तुरंत पैसों की जरूरत है, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर लोन लेना एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प हो सकता है। यह पर्सनल लोन के मुकाबले काफी कम ब्याज दर पर मिलता है और इसमें आपकी FD भी नहीं टूटती। हालांकि, इसमें कुछ जोखिम भी हैं जिन्हें जानना जरूरी है।
FD पर लोन vs पर्सनल लोन: ब्याज दरों का खेल
जब भी अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो लोगों के सामने दो मुख्य विकल्प होते हैं: पर्सनल लोन या FD पर लोन। पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के मिलता है, यानी यह आपकी कमाई और क्रेडिट हिस्ट्री पर निर्भर करता है। वहीं, FD पर लोन एक 'सिक्योर्ड' लोन है, जिसमें आपकी FD ही गारंटी के तौर पर बैंक के पास जमा होती है।
बैंकों के लिए FD पर लोन में जोखिम लगभग न के बराबर होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर आप लोन नहीं चुका पाते, तो बैंक आपकी FD से पैसे वसूल सकता है। इसी वजह से, FD पर लोन की ब्याज दरें पर्सनल लोन के मुकाबले काफी कम होती हैं। आमतौर पर, FD पर लोन की ब्याज दर, आपकी FD पर मिलने वाली ब्याज दर से सिर्फ 0.5% से 2% ज्यादा होती है। दूसरी तरफ, पर्सनल लोन का ब्याज 10% से 20% या उससे भी ज्यादा हो सकता है, जो आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करता है।
झटपट पैसा और फायदे ही फायदे
FD पर लोन का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें प्रोसेसिंग बहुत तेज होती है। चूंकि पैसा पहले से ही बैंक के पास है, इसलिए ज्यादा कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती, न ही क्रेडिट स्कोर या इनकम प्रूफ चेक होता है। यह आपको तुरंत कैश दिलवा सकता है।
एक और खास बात यह है कि लोन चलने के दौरान भी आपकी FD पर ब्याज मिलता रहता है। अगर आप FD तुड़वाकर पैसे निकालते, तो आपको उस पर मिलने वाला ब्याज और शायद कुछ पेनाल्टी भी देनी पड़ती। FD पर लोन लेकर आप इन नुकसानों से बच जाते हैं।
जोखिम और सीमाएं, इन पर भी ध्यान दें
सब कुछ इतना आसान नहीं है। FD पर लोन लेने के कुछ खास जोखिम भी हैं जिन पर गौर करना जरूरी है। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि आपकी FD ही लोन के लिए कोलैटरल (Collateral) यानी गारंटी है। अगर आप लोन चुकाने में नाकाम रहते हैं, तो बैंक आपकी FD को बेचकर अपना बकाया पैसा वसूल कर सकता है। इसका मतलब है कि अगर आपने पैसों का सही मैनेजमेंट नहीं किया, तो आप अपनी जमा-पूंजी खो सकते हैं।
इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। लोन की अवधि (Tenure) आपकी FD की मैच्योरिटी डेट तक ही सीमित रहती है। अगर आपकी FD 6 महीने में मैच्योर हो रही है, तो आपको लोन भी उसी 6 महीने में चुकाना होगा। यह उन लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है जिन्हें लंबे समय के लिए लोन चाहिए।
इसके अलावा, जब आप FD को लोन के लिए गिरवी रखते हैं, तो बैंक उस पर एक 'lien' यानी रोक लगा देता है। ऐसे में, लोन पूरी तरह चुकने तक आप उस FD से कोई पैसा निकाल नहीं सकते या किसी और काम के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते।
इसलिए, अगर आप FD पर लोन लेने का सोच रहे हैं, तो आपको कुल खर्च, यानी प्रोसेसिंग फीस और लोन का ब्याज, FD तुड़वाने पर होने वाले नुकसान से तुलना करनी चाहिए। यह सुविधा उन लोगों के लिए सबसे अच्छी है जिन्हें थोड़े समय के लिए पैसों की जरूरत है और वे पूरा यकीन रखते हैं कि लोन मैच्योरिटी से पहले चुका देंगे।
