Lemon Tree Hotels ने अपने बिजनेस को दो हिस्सों में बांटने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी अपनी प्रॉपर्टी ओनरशिप को होटल मैनेजमेंट से अलग कर रही है, जिससे 'Asset-Light' मॉडल पर ध्यान दिया जा सके और Fleur Hotels के जरिए भारी निवेश किया जा सके।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
Lemon Tree Hotels अब एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी ने अपनी ओनरशिप और होटल मैनेजमेंट ऑपरेशंस को अलग करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब Fleur Hotels को एक 'Asset-Heavy' ग्रोथ व्हीकल के तौर पर तैयार किया जा रहा है, जबकि Lemon Tree पूरी तरह से 'Asset-Light' मॉडल पर शिफ्ट हो जाएगी।
क्या है नया प्लान?
- Asset-Light मॉडल: Lemon Tree अब जमीन खरीदने और निर्माण करने के बजाय मैनेजमेंट और ब्रांडिंग पर फोकस करेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि कंपनी पर कर्ज का बोझ कम होगा और मैनेजमेंट फीस के जरिए हाई-मार्जिन कमाई पर जोर दिया जा सकेगा।
- Fleur Hotels का विजन: इस नई इकाई का काम जमीन खरीदना और होटल विकसित करना होगा। अगले 4 से 5 साल में कंपनी $1 बिलियन का निवेश करने की योजना बना रही है। साथ ही, 2027 तक इसके पब्लिक लिस्टिंग (IPO) का लक्ष्य रखा गया है।
Warburg Pincus का बड़ा दांव
इस वेंचर को गति देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर Warburg Pincus ने बड़ा हाथ आगे बढ़ाया है। उन्होंने Fleur Hotels में 41.09% हिस्सेदारी खरीदी है और ₹960 करोड़ की प्राइमरी कैपिटल का निवेश किया है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
मौजूदा शेयरधारकों को इस डीमर्जर (Demerger) स्कीम के तहत Fleur Hotels के शेयर मिलेंगे। हालांकि, निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह प्रक्रिया NCLT की मंजूरी पर निर्भर है, जिसमें कानूनी देरी की संभावना हो सकती है। इसके अलावा, होटल इंडस्ट्री का प्रदर्शन इकोनॉमिक कंडीशंस और ट्रैवल डिमांड पर निर्भर करता है, जिसे मॉनिटर करना जरूरी होगा।
