AUM में मजबूती, पर NPA का साया!
Laxmi India Finance ने अपनी तीसरी तिमाही, फाइनेंशियल ईयर 2026 (Q3 FY26) के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के Assets Under Management (AUM) में ₹1,451 करोड़ की अच्छी बढ़त देखी गई है। यह ग्रोथ मुख्य रूप से MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और वाहन लोन (Vehicle Loans) जैसे सुरक्षित कर्जों से आई है।
हालांकि, एक बुरी खबर यह है कि कंपनी के Gross Non-Performing Assets (GNPA) बढ़कर 2.4% हो गए हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि यह बढ़ोतरी एक डायरेक्ट असाइनमेंट (DA) ट्रांजैक्शन में पार्टनर एनबीएफसी (NBFC) के डिफॉल्ट (Default) की वजह से हुई है। कंपनी इस नुकसान के लिए ₹9 करोड़ का प्रोविजन (Provision) पहले ही कर चुकी है और बाकी ₹8 करोड़ का प्रोविजन फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में करने की उम्मीद है।
आगे की ग्रोथ पर फोकस
इस NPA की एक बार की घटना के बावजूद, Laxmi India Finance भविष्य के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य बना रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले 5 सालों में अपने AUM को 30-35% की चक्रवर्ती वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ाकर ₹5,000 करोड़ तक ले जाना है।
साथ ही, कंपनी अपनी लाभप्रदता (Profitability) सुधारने पर भी काम कर रही है। मैनेजमेंट का लक्ष्य संपत्ति पर रिटर्न (ROA) को 3.5% से 3.75% के बीच रखना है। उम्मीद है कि कंपनी की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो सकता है, जिससे अगले एक-दो सालों में फंड की लागत (Cost of Funds) 100-150 बेसिस पॉइंट्स कम हो सकती है।
ऑपरेटिंग कॉस्ट और विस्तार की योजना
कंपनी की एक बड़ी चिंता ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Costs) का AUM का लगभग 9% रहना है, जो इंडस्ट्री के मुकाबले काफी ज्यादा है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह 100% डायरेक्ट-सोर्सिंग मॉडल और नए ब्रांच खोलने के कारण है, लेकिन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसमें सुधार की उम्मीद है।
कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2027 की अप्रैल-मई तक महाराष्ट्र में भी विस्तार करने की योजना बना रही है।
मुख्य बातें जिन पर निवेशकों की नजर रहेगी:
- AUM ग्रोथ का 30-35% CAGR लक्ष्य हासिल करना।
- DA ट्रांजैक्शन डिफॉल्ट से हुई रिकवरी और एसेट क्वालिटी पर असर।
- महाराष्ट्र में कंपनी का प्रवेश।
- ऑपरेटिंग कॉस्ट को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी का प्रभावी उपयोग।
- क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड का फंड की लागत पर असर।