Larsen & Toubro (**L&T**) ने ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके **₹500 करोड़** जुटाने का फैसला किया है। **3 साल** की मैच्योरिटी वाले इन बॉन्ड्स पर **7.40%** का कूपन रेट तय किया गया है, जो RBI की डिजिटल करेंसी (CBDC) के जरिए सेम-डे सेटलमेंट की सुविधा देंगे।
Larsen & Toubro (L&T) अब ब्लॉकचेन-आधारित फाइनेंस की दुनिया में प्रवेश कर रही है। कंपनी ने ₹500 करोड़ जुटाने के लिए टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी करने की योजना बनाई है। इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 3 साल की होगी और कंपनी निवेशकों को 7.40% का सालाना कूपन रेट देने वाली है। पारंपरिक बॉन्ड्स के मुकाबले, जहां सेटलमेंट में कई दिन लग जाते हैं, ये बॉन्ड्स RBI की डिजिटल करेंसी (CBDC) का उपयोग करके उसी दिन सेटल हो जाएंगे।
तेजी से बदल रहा है डेट मार्केट
एक बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के लिए यह कदम डेट मार्केट के ऑपरेशंस को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। आमतौर पर बॉन्ड सेटलमेंट के लिए क्लीयरिंग कॉरपोरेशन और मल्टी-स्टेप वेरिफिकेशन की जरूरत होती है, जिसमें 2 दिन तक का समय लग सकता है। ब्लॉकचेन के जरिए ओनरशिप ट्रांसफर होने से यह देरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। खास बात यह है कि इसके लिए प्रतिभागियों के पास एक्टिव CBDC वॉलेट होना अनिवार्य है। इससे पहले सरकारी कंपनी REC ने भी इसी हफ्ते ₹500 करोड़ के टोकनाइज्ड बॉन्ड का सफल पायलट रन पूरा किया है, जो बताता है कि भारत की बड़ी कंपनियां नए डिजिटल फंडिंग चैनलों को सक्रियता से टेस्ट कर रही हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों को यह समझना होगा कि L&T के लिए यह कदम पैसों की जरूरत से ज्यादा, टेक्नोलॉजी को अपनाने का एक प्रयोग है। कंपनी के कुल कारोबार के हिसाब से ₹500 करोड़ का फंड बहुत छोटा है। हालांकि, इसमें कुछ व्यावहारिक जोखिम भी हैं। चूंकि यह सुविधा फिलहाल केवल चुनिंदा संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) के लिए है जिनके पास CBDC वॉलेट है, इसलिए सेकेंडरी मार्केट में इसकी लिक्विडिटी फिलहाल सीमित रह सकती है। इसके अलावा, ब्लॉकचेन-आधारित डेट अभी एक प्रयोग के दौर में है, इसलिए इसके कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
