L&T Finance ने इस फाइनेंशियल ईयर में **500** नई गोल्ड लोन ब्रांच खोलने की घोषणा की है। कंपनी रिटेल सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। पिछले साल ही इस सेक्टर में एंट्री करने वाली L&T Finance का फोकस रिटेल-केंद्रित ग्रोथ पर है। शेयर मंगलवार को **3.27%** चढ़कर **₹315.05** पर बंद हुआ।
रिटेल बिज़नेस का बड़ा विस्तार
L&T Finance ने गोल्ड लोन बिज़नेस में एक बड़ा कदम उठाते हुए चालू फाइनेंशियल ईयर में पूरे भारत में 500 नई ब्रांच खोलने की योजना बनाई है। इस तेज़ विस्तार से कंपनी के नेटवर्क में भारी इज़ाफ़ा होगा, जो 31 मार्च 2026 तक 330 ब्रांचों का था। इस ऐलान के बाद शेयर में तेज़ी देखी गई और यह मंगलवार को 3.27% की बढ़ोतरी के साथ ₹315.05 पर बंद हुआ।
'लक्ष्य 2026' का अहम हिस्सा
यह ब्रांच विस्तार कंपनी की 'लक्ष्य 2026' रणनीति का एक अहम हिस्सा है। इसका मकसद कंपनी को एक रिटेल-केंद्रित, टेक्नोलॉजी-संचालित फाइनेंशियल संस्था बनाना है। गोल्ड लोन इस योजना का मुख्य आधार बन गया है। L&T Finance ने जून 2025 में पॉल मर्चेंट्स फाइनेंस के गोल्ड लोन बिज़नेस को ₹537 करोड़ में खरीदकर इस सेगमेंट में कदम रखा था। इस डील से कंपनी को 130 ब्रांचों का तुरंत आधार और ₹1,350 करोड़ का लोन पोर्टफोलियो मिला, जिसने मौजूदा विस्तार की नींव रखी।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस और ग्रोथ
रिटेल लेंडिंग पर कंपनी का फोकस हालिया नतीजों में भी साफ दिखता है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में, L&T Finance ने नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 29% की बढ़ोतरी के साथ ₹900 करोड़ दर्ज किए। वहीं, नेट इंटरेस्ट इनकम 28% बढ़कर ₹2,920 करोड़ हो गई। अब कंपनी के कुल लोन पोर्टफोलियो का करीब 98% रिटेल लोन है, जो दिखाता है कि कंपनी कॉरपोरेट लेंडिंग से दूर जा रही है।
सेक्टर और रेगुलेटरी माहौल
ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड लोन की मांग तो ज़्यादा है, पर कंपनी नए रेगुलेटरी नियमों के हिसाब से अपनी ग्रोथ प्लानिंग को एडजस्ट कर रही है। अप्रैल 2026 में, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने गोल्ड लेंडिंग के लिए नए नियम लाए हैं, जिसमें सोने के मूल्य के आधार पर लोन की राशि और रीपेमेंट की नई शर्तें शामिल हैं। इसके जवाब में, L&T Finance ने गोल्ड लोन सेगमेंट के लिए अपनी ग्रोथ का अनुमान सालाना 20-25% रखा है, ताकि वह इन सुरक्षा और कंप्लायंस मानकों के साथ बनी रहे।
रिस्क पर नज़र
जब कंपनी यह योजना लागू कर रही होगी, तो निवेशकों को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए। 500 नई ब्रांचों को जल्दी से खोलने में एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risk) है। इसका मतलब है कि कंपनी को स्टाफिंग, ऑपरेशनल खर्चे और लोकल कंपटीशन को ठीक से मैनेज करना होगा ताकि ये ब्रांचें मुनाफे में रहें। साथ ही, चूंकि यह बिज़नेस सोने के बदले लोन देने पर आधारित है, इसलिए कंपनी की एसेट्स सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हैं। अगर सोने के दाम तेज़ी से गिरते हैं, तो इन लोनों की गारंटी का मूल्य कम हो जाता है, जो एसेट क्वालिटी पर दबाव डाल सकता है। इस विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी बदलती रेगुलेटरी व्यवस्था में चलते हुए उच्च सेवा मानकों को कैसे बनाए रखती है।
