📉 फाइनेंसियल नतीजों पर एक नज़र
LKP Finance Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड फाइनेंसियल नतीजे जारी किए हैं। दिसंबर तिमाही में कंपनी की टोटल इनकम ₹11,164.31 लाख रही, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹(1,443.34) लाख थी। इस जबरदस्त उछाल की मुख्य वजह ₹2,122.40 लाख के एक बकाया लोन का राइट-बैक (Write-back) था, जिसे "अन्य इनकम – लोन देनदारी का राइट-बैक" के तौर पर दिखाया गया है। इस तिमाही में स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹590.47 लाख रहा, जबकि कंसोलिडेटेड PAT ₹591.02 लाख दर्ज किया गया।
31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए, स्टैंडअलोन टोटल इनकम बढ़कर ₹13,288.86 लाख हो गई, जो पिछले साल के ₹2,193.77 लाख की तुलना में काफी ज्यादा है। हालांकि, इसी नौ महीने की अवधि के लिए स्टैंडअलोन PAT में थोड़ी गिरावट आई, जो ₹1,563.89 लाख रहा, जबकि पिछले साल यह ₹1,686.90 लाख था।
कंपनी ने 12 दिसंबर, 2025 को Mufinpay Payment Solutions Private Limited में 20.94% इक्विटी हिस्सेदारी का अधिग्रहण भी किया। यह पहली बार है जब एसोसिएट कंपनी को इक्विटी मेथड के तहत अकाउंट करते हुए कंसोलिडेटेड फाइनेंसियल रिजल्ट्स तैयार किए गए हैं।
🚩 कानूनी पेंच और आगे की राह
इन नतीजों के बीच, एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट सामने आया है, जो ऑडिटर M/s. PARV & Co. की ओर से दी गई क्वालिफाइड रिपोर्ट (Qualified Conclusion) है। ऑडिटर ने लंबित मुकदमों और बाहरी कन्फर्मेशन की अनुपस्थिति से जुड़ी अनिश्चितता का हवाला दिया है, जिससे वे वित्तीय नतीजों पर संभावित प्रभावों को निर्धारित नहीं कर पा रहे हैं। यह विवाद उधार से जुड़ा हुआ है, जहां रिकवरी ऑफिसर, DRT, बैंगलोर ने पिछले उधारों के संबंध में ₹2,500 लाख (प्लस ब्याज) का दावा किया है। कंपनी इस दावे का विरोध कर रही है और उसने ₹1,126.22 लाख जमा भी कराए हैं। साथ ही, ₹622.71 लाख के म्यूचुअल फंड निवेश को भी अटैच किया गया है। यह मामला फिलहाल डेब्ट रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल (DRAT), चेन्नई के पास लंबित है। यह अनिश्चितता देनदारी के खुलासे की विश्वसनीयता को सीधे प्रभावित करती है।
रणनीतिक रूप से, LKP Finance एक बड़े परिवर्तन से गुजर रही है। कंपनी के बोर्ड ने LKP Finance Limited से नाम बदलकर Gyftr Limited करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जो शेयरधारकों और नियामक की मंजूरी के अधीन है। इसके साथ ही, कंपनी अपने नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (NBFC) ऑपरेशंस को बंद करने का इरादा रखती है और इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अपने NBFC सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के लिए आवेदन किया है। भविष्य में कंपनी का पूरा फोकस डिजिटल और फिजिकल गिफ्टिंग, रिवार्ड्स और ई-कॉमर्स सेक्टर पर रहेगा, खासकर गिफ्ट कार्ड्स और वाउचर्स में। निवेशकों को इस मुकदमे के परिणाम और नए बिजनेस मॉडल में कंपनी के सफल ट्रांजिशन पर करीब से नजर रखनी चाहिए।