Life Insurance Corporation of India (LIC) ने साफ कर दिया है कि वह National Stock Exchange (NSE) के आगामी IPO में अपने **10.72%** स्टेक को नहीं बेचेगी। कंपनी का यह कदम फाइनेंशियल मार्केट के प्रति उसके भरोसे को दर्शाता है।
बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने की तैयारी
LIC का मैनेजमेंट अब छोटे मुनाफे के बजाय लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर पर दांव लगा रहा है। 10.72% की हिस्सेदारी बरकरार रखकर कंपनी ने यह संकेत दिया है कि वह भारत के फाइनेंशियल मार्केट में अपनी अहम भूमिका को कम नहीं करना चाहती। सितंबर 2026 में आने वाला NSE का IPO पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगा, जिसमें एक्सचेंज की 6% इक्विटी हिस्सेदारी बाजार में आ सकती है।
बिजनेस में बड़ा बदलाव
LIC सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि अपने बिजनेस मॉडल को भी तेजी से बदल रही है। कंपनी अब ट्रेडिशनल प्लान्स की जगह नॉन-पार्टिसिपेटिंग इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स (Non-participating insurance products) पर जोर दे रही है, जो ज्यादा मुनाफे वाले होते हैं। FY26 में ये प्रोडक्ट्स कंपनी के इंडिविजुअल बिजनेस का 35% से ज्यादा हिस्सा बन चुके हैं।
साथ ही, कंपनी ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच बढ़ा रही है और 90% से ज्यादा जिलों में अपनी पैठ बना चुकी है। विदेशी ऑपरेशन्स पर भी कंपनी कड़ा रुख अपना रही है, जहां यूके (UK) यूनिट्स को रन-ऑफ मोड में डाला जा रहा है और सिंगापुर (Singapore) बिजनेस की परफॉर्मेंस की समीक्षा की जा रही है।
SEBI के नियमों का पालन
इससे पहले अगस्त 2026 में LIC ने अपना 6.5% का OFS पूरा किया था, जिससे कंपनी ने ₹31,552 करोड़ जुटाए। यह कदम SEBI के 10% मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करने के लिए उठाया गया था।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
हालांकि, नई स्ट्रैटेजी के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स पर जोर देने से कंपनी के मार्जिन पर ब्याज दरों (Interest rates) में होने वाले बदलावों का असर पड़ सकता है। मार्केट की वोलेटिलिटी का असर LIC के अनलिस्टेड पोर्टफोलियो की वैल्यूएशन पर भी पड़ सकता है, इसलिए निवेशकों को मैनेजमेंट की एग्जीक्यूशन क्षमता पर नजर रखनी होगी।
