आज, 25 जून 2026 को, LIC और Supreme Industries जैसी 17 भारतीय कंपनियों के शेयर 'एक्स-डिविडेंड' (Ex-Dividend) ट्रेडिंग में प्रवेश कर गए हैं। जिन निवेशकों ने एक्स-डेट से पहले शेयर खरीदे थे, वे घोषित डिविडेंड (Dividend) पाने के हकदार होंगे। इन शेयरों से कुल डिविडेंड **₹105** प्रति शेयर से अधिक है। जब कोई स्टॉक एक्स-डिविडेंड हो जाता है, तो आमतौर पर उसकी कीमत डिविडेंड की रकम के बराबर कम हो जाती है।
क्या हुआ आज?
आज, 25 जून 2026 को 17 सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर 'एक्स-डिविडेंड' फेज में चले गए हैं। यह तारीख निवेशकों के लिए काफी अहम है, क्योंकि इसी से तय होता है कि कंपनी का डिविडेंड किसे मिलेगा। डिविडेंड पाने के लिए, निवेशक के डीमैट अकाउंट में शेयर एक्स-डेट से पहले होने चाहिए। इस तारीख या उसके बाद शेयर खरीदने वालों को इस अवधि का घोषित डिविडेंड नहीं मिलेगा।
एक्स-डिविडेंड पर शेयर की कीमत में एडजस्टमेंट
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि एक्स-डिविडेंड की तारीख पर, कंपनी के शेयर की कीमत में एक सामान्य एडजस्टमेंट होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि डिविडेंड कंपनी की कमाई से दिया जाता है, जिससे नकदी कम हो जाती है। नतीजतन, एक्सचेंज पर शेयर की कीमत आमतौर पर डिविडेंड की राशि के आसपास गिर जाती है। यह कंपनी के प्रदर्शन में गिरावट का संकेत नहीं है, बल्कि बाजार का एक सामान्य एडजस्टमेंट है।
प्रमुख डिविडेंड और कंपनियां
जिन कंपनियों के शेयर आज एक्स-डिविडेंड हुए हैं, उनमें विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी कंपनियां शामिल हैं। सबसे बड़े डिविडेंड में से एक Supreme Industries का है, जिसने ₹25 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। अन्य प्रमुख भुगतानों में CARE Ratings से ₹14 प्रति शेयर, Nippon Life India Asset Management से ₹12.5 और LIC तथा Alkyl Amines Chemicals से ₹10 प्रति शेयर शामिल हैं।
इस सूची में IndusInd Bank, Dr Lal PathLabs, Syngene International, Allied Blenders and Distillers, Anthem Biosciences, GIC Housing Finance, Sona BLW Precision Forgings और Visaka Industries जैसी कंपनियां भी शामिल हैं, जिन्होंने ₹1.2 प्रति शेयर का डिविडेंड दिया है। कुल मिलाकर, इन सत्रह फर्मों से मिलने वाला भुगतान लंबी अवधि के शेयरधारकों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
नकद भुगतान के अलावा, निवेशक अक्सर अपने कुल रिटर्न की रणनीति के संदर्भ में डिविडेंड का मूल्यांकन करते हैं। 'डिविडेंड यील्ड' (Dividend Yield) देखना उपयोगी होता है, जो कि प्रति शेयर डिविडेंड और स्टॉक की मौजूदा बाजार कीमत का अनुपात है। उच्च यील्ड आकर्षक हो सकती है, लेकिन निवेशकों को कंपनी की विकास संभावनाओं, ऋण स्तरों और भुगतान की दीर्घकालिक स्थिरता के मुकाबले इसका मूल्यांकन करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, निवेशकों को डिविडेंड पर टैक्स के असर को भी याद रखना चाहिए। भारत में, डिविडेंड आमतौर पर निवेशक की लागू आयकर स्लैब के अनुसार कराधान के दायरे में आता है। इसलिए, डिविडेंड का शुद्ध लाभ निवेशक की व्यक्तिगत कर स्थिति पर निर्भर करता है। आय-केंद्रित निवेशक प्रबंधन के मुनाफे को साझा करने के दृष्टिकोण का अंदाजा लगाने के लिए कंपनी के पिछले डिविडेंड इतिहास और भुगतान की स्थिरता पर नज़र रखना एक सामान्य तरीका है।
