सरकार ने Life Insurance Corporation of India (LIC) में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 10% पब्लिक होल्डिंग का लक्ष्य समय से काफी पहले ही हासिल कर लिया है। DIPAM सेक्रेटरी अरुणिश चावला ने बताया कि कुल **82.23 करोड़** शेयर बेचकर इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफरिंग बना दिया गया है।
रणनीतिक मील का पत्थर
सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए LIC में अपनी 6.5% हिस्सेदारी को सफलतापूर्वक बेच दिया है। यह प्रक्रिया रेगुलेटरी डेडलाइन से 10 महीने पहले पूरी हुई है। इस कदम के साथ ही, कंपनी की पब्लिक होल्डिंग अब Securities and Exchange Board of India (SEBI) द्वारा तय किए गए 10% के अनिवार्य बेंचमार्क तक पहुंच गई है, जबकि इसके लिए समय सीमा मई 2027 तक थी।
बाजार का जोरदार रिस्पॉन्स
ऑफर के दौरान निवेशकों का उत्साह देखने लायक था। इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने बेस इश्यू को 3.32 गुना सब्सक्राइब किया, वहीं रिटेल पार्टिसिपेशन 1.82 गुना रहा। जबरदस्त मांग को देखते हुए सरकार ने अपने पूरे ग्रीन-शू विकल्प (Green-shoe option) का इस्तेमाल किया और कुल 82.23 करोड़ शेयर बाजार में उतारे। यह सफलता दिखाती है कि मई 2022 में महज 3.5% पब्लिक फ्लोट के साथ लिस्ट होने वाली इस कंपनी पर बाजार का भरोसा अब काफी बढ़ गया है।
बढ़ता रिटेल फुटप्रिंट
DIPAM सेक्रेटरी अरुणिश चावला ने भारत के बदलते फाइनेंशियल इकोसिस्टम पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश में डीमैट अकाउंट्स की संख्या 6 साल पहले के 40 लाख से बढ़कर अब 2.4 करोड़ के पार पहुंच गई है। बचत के तौर-तरीकों में आए इस बड़े बदलाव के बीच म्यूचुअल फंड्स अब लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का मुख्य इंजन बन गए हैं। सरकार का लक्ष्य एसेट मैनेजमेंट के जरिए रिटेल निवेशकों और प्रोफेशनल मैनेजर्स के बीच संबंधों को और मजबूत करना है।
