श्री मुक्तसर साहिब के कंज्यूमर फोरम ने LIC को एक मृत पॉलिसीधारक के परिवार को **₹5 लाख** का डेथ क्लेम भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पाया कि कंपनी के पास क्लेम खारिज करने का कोई ठोस आधार नहीं था और उनके डॉक्यूमेंटेशन में भारी गड़बड़ी थी।
कोर्ट का फैसला और जुर्माना
श्री मुक्तसर साहिब के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने बीमा कंपनी LIC को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कंपनी को ₹5 लाख का पूरा डेथ क्लेम भुगतान करने को कहा है। इसके अलावा, कंपनी को जनवरी 2024 से 7% सालाना ब्याज और कानूनी खर्च के तौर पर ₹10,000 का हर्जाना भी देना होगा।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला पॉलिसीधारक सुखदेव सिंह की अगस्त 2023 में हुई मौत से जुड़ा है। LIC ने यह कहते हुए क्लेम रिजेक्ट कर दिया था कि पॉलिसीधारक ने 2008 की एक मेडिकल स्थिति को छिपाया था। हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान कंपनी अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई भी मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकी।
डॉक्यूमेंटेशन में बड़ी गड़बड़ियां
कोर्ट ने LIC के द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच की, तो उसमें कई चौंकाने वाली खामियां मिलीं:
- फॉर्म की त्रुटि: एक प्रपोजल फॉर्म पर न तो हस्ताक्षर थे और न ही तारीख दर्ज थी।
- तारीखों का हेरफेर: दूसरा फॉर्म मई 2022 का था, जबकि पॉलिसी अप्रैल 2022 में ही जारी कर दी गई थी।
न्यायिक संस्था ने स्पष्ट किया कि केवल अस्पष्ट आरोपों के आधार पर किसी का क्लेम खारिज करना गलत है। बीमा कंपनियों के लिए यह एक कड़ा सबक है कि क्लेम सेटलमेंट प्रोसेस में पारदर्शिता और सही डॉक्यूमेंटेशन कितना जरूरी है। IRDAI जैसे रेगुलेटर्स भी लगातार कंज्यूमर प्रोटेक्शन पर जोर दे रहे हैं, ताकि पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा की जा सके।
