National Consumer Disputes Redressal Commission ने LIC को एक 12 साल पुराने मामले में मृत पॉलिसीधारक के परिवार को **₹1.26 करोड़** से ज्यादा का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) ने Life Insurance Corporation of India (LIC) के खिलाफ एक कड़ा फैसला सुनाया है। यह मामला 2014 से चला आ रहा था, जिसमें कंपनी ने एक पॉलिसीधारक के क्लेम को यह कहकर खारिज कर दिया था कि उसने बीमारी की जानकारी छुपाई थी।
क्या था पूरा मामला?
पॉलिसीधारक ने 2010 में पांच इंश्योरेंस पॉलिसी ली थीं। 2013 में मृत्यु के बाद जब परिवार ने क्लेम किया, तो LIC ने यह तर्क दिया कि मृत व्यक्ति को पहले से ही डायबिटीज की समस्या थी, जिसे उन्होंने फॉर्म भरते समय नहीं बताया था। हालांकि, जांच में NCDRC ने पाया कि कंपनी के पास इसके कोई पुख्ता सबूत नहीं थे। कोर्ट ने पाया कि 2013 के मेडिकल रिकॉर्ड्स में भी उन्हें नॉन-डायबिटिक बताया गया था।
ब्याज ने बढ़ाया बोझ
इस मामले में मूल क्लेम राशि ₹60 लाख थी, लेकिन कोर्ट ने 9% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है। 12 साल का लंबा समय बीत जाने के कारण ब्याज जुड़कर अब यह राशि ₹1.26 करोड़ के पार पहुंच गई है, जो मूल क्लेम से दोगुना से भी ज्यादा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
LIC के शेयर फिलहाल ₹408 से ₹412 के दायरे में ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि कंपनी के बड़े बैलेंस शीट के सामने यह राशि बहुत छोटी है, लेकिन ऐसी कानूनी हार कंपनी की 'क्लेम सेटलमेंट' प्रक्रिया की दक्षता पर सवाल उठाती है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर ऐसे कानूनी खर्चों का दबाव लंबे समय तक बना रहेगा।
