LIC Housing Finance ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। बैड लोन्स में कमी के दम पर कंपनी का नेट प्रॉफिट **11%** बढ़कर **₹150.7 करोड़** हो गया है, हालांकि मार्जिन पर दबाव अभी भी बरकरार है।
मुनाफे का गणित और कमाई के आंकड़े
सितंबर 2026 की तिमाही के लिए आए नतीजों में कंपनी ने ₹150.7 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹135 करोड़ के मुकाबले 11% अधिक है। हालांकि, कंपनी की टॉप-लाइन ग्रोथ काफी सुस्त रही। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में सिर्फ 2% की मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, जो ₹2,088 करोड़ रही, जबकि पिछले साल यह ₹2,038 करोड़ थी।
एसेट क्वालिटी और लोन बुक की स्थिति
राहत की बात यह है कि कंपनी के लोन पोर्टफोलियो की क्वालिटी में सुधार हुआ है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) का अनुपात सितंबर 2026 में घटकर 2.05% पर आ गया है, जो पिछले साल 2.65% था। वहीं, नेट NPA भी 1.19% से घटकर 1.06% रह गया है। कंपनी का कुल लोन बुक भी 5% बढ़कर ₹3.26 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल ₹3.11 लाख करोड़ था।
मार्जिन पर दबाव और मार्केट का कॉम्पिटिशन
लोन बुक में बढ़त के बावजूद, कंपनी के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव साफ दिख रहा है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछले साल के 2.62% से गिरकर 2.58% हो गया है, जो यह दर्शाता है कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट और फंड जुटाने की लागत का असर बॉटम लाइन पर पड़ा है। हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में आज के समय में बैंकों और अन्य स्पेशलाइज्ड लेंडर्स के बीच काफी कॉम्पिटिशन है, जिसका असर कंपनियों की प्राइसिंग पावर पर पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने मार्जिन को कैसे सुधारती है और लोन ग्रोथ की रफ्तार क्या रहती है। बैड लोन्स में गिरावट कंपनी की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए अच्छा संकेत है, लेकिन सुस्त इनकम ग्रोथ यह बताती है कि कंपनी को रिस्क मैनेजमेंट और मार्केट विस्तार के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा। मैनेजमेंट की आगे की कमेंट्री और ग्रोथ स्ट्रैटेजी शेयर के अगले मूव के लिए अहम साबित होगी।
