भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को HDFC Bank में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की इजाजत दे दी है। अब LIC बैंक में **9.99%** तक हिस्सेदारी रख सकेगी।
LIC के लिए बड़ी खबर!
RBI ने LIC को HDFC Bank में अपनी हिस्सेदारी 9.99% तक बढ़ाने के लिए हरी झंडी दे दी है। यह मंजूरी 19 अगस्त, 2026 को दी गई है, जिसके बाद LIC बैंक के कुल पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग अधिकारों का 9.99% तक अधिग्रहण कर सकती है। आपको बता दें कि 14 अगस्त, 2026 तक LIC के पास HDFC Bank के 4.11% शेयर थे।
इस मंजूरी से LIC, जो भारत के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक है, देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक में अपनी हिस्सेदारी को काफी बढ़ा सकती है। हालांकि, इस मंजूरी के साथ कुछ कड़े नियम और शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। LIC को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी कुल हिस्सेदारी 9.99% की सीमा को पार न करे और उसे बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और RBI के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। इसके अलावा, LIC को SEBI और FEMA के नियमों का भी पालन करना होगा।
HDFC Bank के नतीजों पर एक नज़र
यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब HDFC Bank एक जटिल कारोबारी माहौल से गुजर रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे 18 जुलाई, 2026 को जारी किए गए थे। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹19,060 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 5% अधिक है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों को इससे भी बेहतर नतीजों की उम्मीद थी, जिससे बैंक के ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) निवेशकों के लिए एक अहम पैमाना बनी हुई है। अप्रैल-जून तिमाही में, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) का अनुपात 1.17% था, जबकि नेट NPA अनुपात 0.41% रहा। यह आंकड़े पिछली तिमाही की तुलना में बढ़े हुए बैड लोन (Bad Loan) को दर्शाते हैं, जिस पर निवेशक अक्सर बारीकी से नज़र रखते हैं।
आगे क्या?
शेयरधारकों और बाजार की नजर इस बात पर होगी कि LIC अतिरिक्त शेयर कब और कैसे खरीदेगी। हालांकि मंजूरी 9.99% हिस्सेदारी रखने की है, लेकिन असली समय और तरीका बाजार की स्थितियों और LIC की निवेश रणनीति पर निर्भर करेगा।
इसके अलावा, निवेशकों की निगाह HDFC Bank की मार्जिन (Margin) और डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) को मैनेज करने की क्षमता पर भी रहेगी। बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव देखा गया है, जो FY27 की पहली तिमाही में 3.26% पर था। निवेशक यह देखेंगे कि बैंक अपने लोन बुक के विस्तार को स्थिर एसेट क्वालिटी और बेहतर मार्जिन के साथ कैसे संतुलित करता है।
