LIC का तिमाही मुनाफा ₹23,420 करोड़ पार! SBI और HDFC Bank को छोड़ा पीछे, पर सालाना मुनाफे में SBI अव्वल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
LIC का तिमाही मुनाफा ₹23,420 करोड़ पार! SBI और HDFC Bank को छोड़ा पीछे, पर सालाना मुनाफे में SBI अव्वल
Overview

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने मार्च तिमाही में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए **₹23,420 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह आंकड़ा SBI और HDFC Bank जैसे बड़े बैंकों से भी ज्यादा है। हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) में SBI का मुनाफा **₹80,032 करोड़** के साथ सबसे ऊपर रहा। LIC के प्रीमियम कलेक्शन और मार्जिन में सुधार के बावजूद, सरकारी कंपनी होने के नाते इसे अभी भी अपनी वैल्यू साबित करने का दबाव झेलना पड़ रहा है।

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तिमाही नतीजों में LIC का जलवा

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की चौथी तिमाही में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹23,420 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹19,013 करोड़ के मुकाबले 23% ज्यादा है। इस तिमाही में LIC का मुनाफा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ₹19,684 करोड़ और HDFC Bank के ₹19,221 करोड़ के मुनाफे से भी कहीं आगे निकल गया। यह बेहतर प्रीमियम कलेक्शन और नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स की ओर झुकाव के कारण संभव हुआ, जिससे कंपनी के वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) मार्जिन में 21.2% का इजाफा हुआ।

सालाना प्रदर्शन और बिजनेस मॉडल का अंतर

जहां LIC ने तिमाही मुनाफे में बाजी मारी, वहीं पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में SBI ने ₹80,032 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमाकर टॉप पोजिशन हासिल की। SBI की यह सफलता मजबूत क्रेडिट ग्रोथ का नतीजा है। LIC का FY26 का कुल सालाना मुनाफा ₹57,419 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 19% ज्यादा है, लेकिन बैंकों के मुकाबले कम है। यह अंतर दोनों के बिजनेस मॉडल की प्रकृति को दर्शाता है: बैंकों ने क्रेडिट-उन्मुख माहौल का फायदा उठाया, जबकि LIC को एक सरकारी संस्था के तौर पर रिटेल ग्रोथ और प्राइवेट इंश्योरर्स की तुलना में वैल्यूएशन साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

वैल्यूएशन पर चिंताएं और रिस्क

मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद, LIC के स्टॉक वैल्यूएशन पर सवाल बने हुए हैं। सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी होने के कारण, यह प्राइवेट सेक्टर के प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में काफी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। इस डिस्काउंट का एक कारण सरकार द्वारा भविष्य में हिस्सेदारी बेचने की आशंकाएं और इक्विटी मार्केट को सपोर्ट करने में LIC की ऐतिहासिक भूमिका है। VNB मार्जिन में सुधार के बावजूद, कंपनी का इन्वेस्टमेंट इनकम पर निर्भरता साल-दर-साल नतीजों में उतार-चढ़ाव ला सकती है। जानकारों का मानना है कि LIC का विशाल आकार, जहां उसे बाजार में व्यापक पहुंच देता है, वहीं यह उसे छोटे और तेजी से बढ़ते प्राइवेट इंश्योरर्स की तुलना में कम फुर्तीला बना सकता है। सरेंडर वैल्यू और टैक्सेशन से जुड़े रेगुलेटरी बदलाव भी कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए लगातार जोखिम बने हुए हैं।

एनालिस्ट्स का नज़रिया

FY27 को देखते हुए, एनालिस्ट्स इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि LIC आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपने VNB मार्जिन को बनाए रखने में कितना सफल रहता है। हालिया नतीजों के बाद, ब्रोकरेज फर्मों का रुख सतर्कतापूर्ण आशावाद की ओर बढ़ा है, जिसमें कुछ ने टारगेट प्राइस भी बढ़ाए हैं। आम राय यह है कि अगर LIC अपने नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स का विकास करता है और अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करता है, तो यह अपने वैल्यूएशन गैप को कम कर सकता है। हालांकि, स्टॉक का भविष्य बड़े-कैप PSU स्टॉक्स में निवेशकों की रुचि और कंपनी की डिजिटल पहलों की प्रभावशीलता पर भी निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.