क्यों किया जा रहा है बोनस शेयर का ऐलान?
LIC का यह फैसला मजबूत नतीजों के बाद आया है। मार्च 2026 तिमाही के लिए कंपनी ने ₹23,467 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 23% ज्यादा है। कंपनी अपने भारी-भरकम रिजर्व्स में से ₹6,325 करोड़ को कैपिटलाइज कर रही है। आसान भाषा में समझें तो, यह कंपनी के अंदर जमा सरप्लस (Surplus) को इक्विटी (Equity) में बदलने जैसा है। इस कदम से कंपनी के कुल शेयरों की संख्या तो दोगुनी हो जाएगी, लेकिन कंपनी की असल वैल्यू पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे शेयर का भाव कम दिखेगा और रिटेल निवेशकों के लिए यह खरीदना आसान हो जाएगा।
प्राइवेट कंपनियों से वैल्यूएशन का अंतर
HDFC Life और SBI Life जैसी प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों के मुकाबले LIC का वैल्यूएशन (Valuation) अभी भी कम है। जहां प्राइवेट कंपनियां 70x-80x के P/E रेशियो पर ट्रेड करती हैं, वहीं LIC का P/E करीब 9x-10x के आसपास है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मार्केट को प्राइवेट कंपनियों से ग्रोथ की ज्यादा उम्मीदें हैं। प्राइवेट इंश्योरर ज्यादा मार्जिन वाले नॉन-पार्टिसिपेटिंग और यूनिट-लिंक्ड बिजनेस पर फोकस करते हैं, जबकि LIC अपने बड़े एजेंसी नेटवर्क और छोटे शहरों तक अपनी पहुंच का फायदा उठाती है। बोनस शेयर का ऐलान कंपनी की फाइनेंशियल मजबूती का संकेत माना जा रहा है, जिसका मकसद मार्केट शेयर को लेकर चिंताओं को कम करना है। मार्च 2026 तक LIC का मार्केट शेयर लगभग 56.7% था।
क्या हैं चिंताएं?
बोनस शेयर के ऐलान के बावजूद, कुछ संस्थाएं LIC की लंबी अवधि की ग्रोथ को लेकर थोड़ी सतर्क हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि ग्लोबल टेंशन और आर्थिक चुनौतियों का असर इंश्योरेंस की मांग पर पड़ सकता है। साथ ही, भले ही LIC मार्केट लीडर है, लेकिन डिजिटल-फर्स्ट प्राइवेट इंश्योरर्स के आने से इसका शेयर धीरे-धीरे कम हुआ है, खासकर युवा ग्राहकों के बीच। एनालिस्ट्स का यह भी मानना है कि LIC का पारंपरिक पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स पर ज्यादा फोकस, प्राइवेट कंपनियों की तुलना में कम मार्जिन दे सकता है। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपग्रेड करने की है, ताकि वह तेजी से बदलते फिनटेक (Fintech) माहौल में टिक सके।
आगे क्या?
मार्केट का भरोसा इस बात पर टिका रहेगा कि यह बोनस शेयर रिटेल निवेशकों की रुचि को कितना बनाए रख पाता है। कंपनी ने ₹10 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का भी ऐलान किया है। हालांकि, लंबी अवधि में स्टॉक का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि LIC रेगुलेटरी बदलावों के साथ कैसे तालमेल बिठाती है और ज्यादा मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स की ओर कितना बढ़ती है। निवेशकों की नजर अब कंपनी के प्रोडक्ट मिक्स और मार्जिन सस्टेनेबिलिटी पर रहेगी, क्योंकि ये फैक्टर्स बोनस शेयर के लिक्विडिटी फायदे से कहीं ज्यादा अहम साबित होंगे।
