Kotak Mahindra Bank Share: ग्राहकों को मिलेगी अब आसानी से लोन, बैंक ने बढ़ाई रफ्तार!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Kotak Mahindra Bank Share: ग्राहकों को मिलेगी अब आसानी से लोन, बैंक ने बढ़ाई रफ्तार!

Kotak Mahindra Bank एक बार फिर अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Lending) सेगमेंट में तेजी लाने को तैयार है। पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड जैसे प्रोडक्ट में ग्रोथ बढ़ाने के साथ-साथ बैंक RBI के स्वैप विंडो का इस्तेमाल करके विदेशी मुद्रा जमा (Foreign Currency Deposits) बढ़ा रहा है।

अनसिक्योर्ड लोन में ग्रोथ की वापसी

Kotak Mahindra Bank अब पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और माइक्रो-फाइनेंस जैसे अनसिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो को बढ़ाने की ओर बढ़ रहा है। पहले इन क्षेत्रों में सावधानी बरतते हुए ग्रोथ को धीमा किया गया था, लेकिन जून तिमाही के नतीजों में इन लोन कैटेगरी में बढ़ोतरी देखी गई है। यह बैंक के लिए एक संकेत है कि वह कंज्यूमर और छोटे बिजनेसेज को लोन देने में मौजूदा रिस्क-रिवॉर्ड को लेकर अब सहज है।

क्वालिटी और प्रॉफिट पर फोकस

बैंक के मैनेजमेंट का कहना है कि यह ग्रोथ जल्दबाजी में नहीं की जाएगी। ग्रुप CFO देवंग घेवाला ने हालिया अर्निंग्स कॉल में बताया कि बैंक ग्रोथ को एक तय दायरे में रखेगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि क्रेडिट कॉस्ट (जो लोन वापस नहीं मिलने पर अलग रखे जाते हैं) कंट्रोल में रहें और प्रॉफिट मार्जिन भी सुरक्षित रहे। यह मैनेजमेंट के सतर्क रवैये को दर्शाता है, जो एग्रेसिव मार्केट शेयर हासिल करने से ज्यादा बैलेंस शीट की स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।

माइक्रो-फाइनेंस सेक्टर में, बैंक जोखिम कम करने के लिए 'क्रेडिट गारंटी फंड फॉर माइक्रो यूनिट्स' का इस्तेमाल कर रहा है। यह स्कीम नए लोन के लिए फुल कवरेज देती है, जो डिफॉल्टर होने की स्थिति में सुरक्षा कवच का काम करती है।

FCNR डिपॉजिट से फंडिंग को मजबूती

लोन देने के अलावा, बैंक अपनी फंडिंग को बेहतर बनाने पर भी काम कर रहा है। इसके लिए, बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा दी गई विशेष स्वैप विंडो का उपयोग करके फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR-B) डिपॉजिट को टारगेट कर रहा है। इस स्ट्रैटेजी से बैंक नॉन-रेजिडेंट इंडियंस और ग्लोबल पार्टनर्स से कैपिटल जुटाने में सक्षम होगा।

CEO अशोक(Ashok) वासवानी ने बताया कि बैंक तीन और पांच साल की डिपॉजिट पर फोकस कर रहा है। फिलहाल, बैंक की फंडिग का एक बड़ा हिस्सा शॉर्ट-टर्म का है। लंबी अवधि की फॉरेन करेंसी डिपॉजिट हासिल करके, बैंक अपनी फंडिंग बेस को ज्यादा स्टेबल और प्रेडिक्टेबल बनाना चाहता है। इससे बैंक को इंटरेस्ट रेट के रिस्क को बेहतर ढंग से मैनेज करने और भविष्य में बड़े इन्वेस्टमेंट एक्टिविटीज को सपोर्ट करने में मदद मिल सकती है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आगे चलकर, शेयरधारकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोन ग्रोथ की रफ्तार क्या रहती है और अनसिक्योर्ड पोर्टफोलियो बढ़ने के साथ बैंक अपनी एसेट क्वालिटी को कैसे बनाए रखता है। निवेशक FCNR डिपॉजिट जुटाने की प्रभावशीलता पर भी अपडेट्स चाहेंगे, जो बैंक की ओवरऑल कॉस्ट ऑफ फंड्स और फंडिंग स्टेबिलिटी को बेहतर बना सकते हैं। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन सेगमेंट में कॉम्पिटिशन पर बैंक की कमेंट्री भी अहम होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.