कोटक का इंकार और सरकारी डील का रास्ता साफ
Kotak Mahindra Bank ने IDBI Bank के अधिग्रहण के लिए फाइनेंशियल बिड जमा न करने की पुष्टि कर दी है। यह खबर मीडिया में चल रही अटकलों के बीच आई है। हालांकि, इस बड़े नाम के हटने के बावजूद, सरकार IDBI Bank में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेचने के विनिवेश (Divestment) प्रक्रिया में आगे बढ़ रही है। केंद्र सरकार और LIC दोनों ने मिलकर यह स्टेक बेचने का फैसला किया है, और अब इस पर फाइनल फाइनेंशियल बिड्स सरकार को मिल चुकी हैं। इन बोलियों का मूल्यांकन तय प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।,
बची हुई कंपनियां और संभावित खरीदार
RBI ने पहले ही चार संस्थाओं - Kotak Mahindra Bank, Fairfax India Holdings, Emirates NBD, और Oaktree Capital - को 'फिट एंड प्रॉपर' (Fit and Proper) माना था। Kotak के बाहर होने के बाद, अब मुख्य मुकाबला Fairfax India Holdings और Emirates NBD के बीच माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इस पूरे सौदे को फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) तक पूरा करना है।,
IDBI Bank की वैल्यूएशन और अन्य बिडर्स
IDBI Bank, जो कभी सरकारी बैंक थी, ने हाल के दिनों में अपने वित्तीय प्रदर्शन में सुधार दिखाया है। बैंक का CAR (Capital Adequacy Ratio) 25.05% है, ROA (Return on Assets) 1.94% है, और P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 12.20 है। शुरुआती फरवरी 2026 तक IDBI Bank की मार्केट कैप (Market Cap) करीब ₹1.11 से ₹1.17 ट्रिलियन के आसपास आंकी गई थी। वहीं, Kotak Mahindra Bank का P/E रेश्यो 30.31 है। Fairfax India Holdings, जिसका शेयर भाव करीब US$17.00-US$17.60 चल रहा है, उसका P/E रेश्यो लगभग 70.8x है, हालांकि इस पर 'Buy' की कंसेंसस (Consensus) बनी हुई है। Emirates NBD का शेयर भाव लगभग AED 34.000 के स्तर पर था। सरकार को इस विनिवेश से लगभग ₹33,000 करोड़ मिलने की उम्मीद है।,
पिछला सफर और सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन
IDBI Bank के विनिवेश की प्रक्रिया बजट 2020 में पहली बार घोषित की गई थी। 2019 में LIC द्वारा बैंक को संभालने के लिए ₹21,000 करोड़ के कैपिटल इनफ्यूजन (Capital Infusion) के बाद यह कदम उठाया गया था। बैंक 2021 में Prompt Corrective Action (PCA) फ्रेमवर्क से बाहर आ गया था, जो इसके ऑपरेशनल सुधार का संकेत था। भारतीय बैंकिंग सेक्टर का पूरा प्रदर्शन इस समय काफी मजबूत है, जहां कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy) लगभग 17% और ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) करीब 3% हैं। इस मजबूत बैकग्राउंड में IDBI का प्राइवेटाइजेशन (Privatization) सरकार की बैंकिंग रिफॉर्म एजेंडा के लिए एक बड़ा टेस्ट केस माना जा रहा है।,
जोखिम और आगे की राह
IDBI Bank के विनिवेश में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। Kotak Mahindra Bank का बाहर निकलना यह संकेत दे सकता है कि वे IDBI Bank की जटिलताओं या वैल्यूएशन को लेकर आश्वस्त नहीं थे। किसी भी सफल खरीदार को RBI और अन्य नियामक संस्थाओं से अंतिम मंजूरी लेनी होगी, जिसमें समय लग सकता है। IDBI Bank के स्टॉक में ऐतिहासिक अस्थिरता रही है, और किसी नए मालिक को इसका स्ट्रक्चरल और ऑपरेशनल रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) करने के लिए बड़े निवेश और रणनीति की जरूरत होगी।,
सरकारी लक्ष्य और भविष्य की दिशा
सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचने के अपने लक्ष्य पर कायम है और FY26 तक इसे पूरा करने की उम्मीद कर रही है। हालांकि, कुछ सूत्रों का मानना है कि यह FY27 तक भी जा सकता है। फिलहाल, वित्तीय बोलियों के मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित है, और उम्मीद है कि मार्च 2026 के अंत तक एक विजेता का नाम सामने आ सकता है। यह रणनीतिक बिक्री सरकार के बैंकिंग सेक्टर में अपनी उपस्थिति कम करने के व्यापक लक्ष्य का एक अहम हिस्सा है।