₹150 करोड़ की विसंगति: Kotak Bank की जांच शुरू
हरियाणा के विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो ने Kotak Mahindra Bank के खिलाफ पंचकूला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के साथ ₹150 करोड़ की कथित वित्तीय विसंगति के मामले में एक औपचारिक जांच (probe) शुरू कर दी है। इस खुलासे से बैंक की ऑपरेशनल इंटीग्रिटी पर सवाल उठ रहे हैं।
कैसे सामने आया मामला और शेयर पर दबाव
यह जांच म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा ₹58 करोड़ की एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के गायब होने का पता चलने के बाद शुरू हुई, जो बाद में बढ़कर ₹150 करोड़ से अधिक की कुल विसंगति बन गई। इस खबर के बीच Kotak Mahindra Bank का शेयर भी दबाव में है और अपने ₹366.85 के 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। बैंक का मार्केट कैप मार्च 2026 तक लगभग ₹3.65-3.73 ट्रिलियन के आसपास था।
RBI की सख्ती और बाज़ार का हाल
यह मामला इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि अप्रैल 2024 में ही भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंक के IT सिस्टम में गंभीर कमियों के चलते नए डिजिटल ग्राहक जोड़ने और क्रेडिट कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी थी। इस नई जांच से निवेशकों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। वहीं, पिछले एक महीने में Nifty Bank इंडेक्स 14.31% गिर चुका है, और Kotak Mahindra Bank, जिसका इस इंडेक्स में 7.50% वेटेज है, पिछले एक साल में लगभग 15.7% टूटा है, जो अन्य साथियों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन को दर्शाता है।
एनालिस्ट्स की राय और इंटरनल कंट्रोल पर सवाल
कई एनालिस्ट्स ने स्टॉक पर 'Buy' या 'Strong Buy' रेटिंग और ₹494.97 का टारगेट प्राइस दे रखा है। हालांकि, हाल ही में बैंक का मोजो ग्रेड 'Buy' से 'Hold' पर डाउनग्रेड किया गया था। Kotak का P/E रेश्यो (TTM) 19-24x है, जो Nifty Bank के मीडियन 11.10x से काफी ऊपर है। इस वित्तीय जांच और RBI की पिछली कार्रवाइयों के मद्देनजर, बैंक के इंटरनल कंट्रोल और रिस्क मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ लोगों को यह भी शक है कि कॉर्पोरेशन और बैंक कर्मचारियों के बीच मिलीभगत हो सकती है।
भविष्य की राह और निवेशकों का भरोसा
Kotak Mahindra Bank का कहना है कि विवादित राशि का एक बड़ा हिस्सा सुलझाया जा रहा है और वे अथॉरिटीज के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। एनालिस्ट्स मोटे तौर पर अभी भी पॉजिटिव हैं, लेकिन RBI की पुरानी समस्याओं के साथ-साथ इस ₹150 करोड़ की जांच को देखते हुए, प्रबंधन के प्रयासों पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत होगी ताकि बैंक के इंटरनल कंट्रोल और गवर्नेंस में निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल हो सके।