Kotak Alternate Asset Managers ने अपनी निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनी डिस्ट्रेस्ड एसेट्स के बजाय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी ट्रांजिशन और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रही है। फर्म का अनुमान है कि साल **2032** तक भारत का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट **14-15%** की सालाना दर से बढ़ेगा।
Kotak Alternate Asset Managers ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब भविष्य के ग्रोथ सेक्टरों पर दांव लगाने का फैसला किया है। कंपनी ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी ट्रांजिशन और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को अपने पोर्टफोलियो का केंद्र बनाया है। यह बदलाव HKR Roadways जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से सफल एग्जिट के बाद आया है, जिसने कंपनी की बड़ी एसेट्स को टर्नअराउंड करने की क्षमता को साबित किया है।
प्राइवेट क्रेडिट की मजबूती
कंपनी का मानना है कि भारतीय प्राइवेट क्रेडिट मार्केट ग्लोबल मार्केट्स के मुकाबले काफी सुरक्षित है। अमेरिका जैसे बाजारों में जहां हाई-रिस्क जूनियर डेट मॉडल का चलन है, वहीं भारत में फोकस सीनियर-सिक्योर्ड लोन पर है। साथ ही, Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) और RERA जैसे रेगुलेटरी बदलावों ने कॉर्पोरेट लेंडिंग में अनुशासन लाया है।
टैक्स की बड़ी बाधा
हालांकि, कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स के मालिकाना हक को लेकर चिंता जताई है। वर्तमान में, InvITs (Infrastructure Investment Trusts) का एक बड़ा हिस्सा विदेशी स्पॉन्सर्स के पास है। क्योंकि ये ट्रस्ट अपनी 90% कमाई बांट देते हैं, इसलिए देश का एक बड़ा कैश फ्लो विदेश चला जाता है।
कंपनी के लीडर्स का कहना है कि घरेलू पेंशन फंड और इंश्योरेंस कंपनियों के पास इन्हें होल्ड करने की क्षमता है, लेकिन टैक्स का अंतर इसमें बड़ी रुकावट है। विदेशी संस्थाओं को 5% विदहोल्डिंग टैक्स का फायदा मिलता है, जबकि घरेलू निवेशकों पर 40% तक का टैक्स लग सकता है। निवेश जानकारों का मानना है कि यदि इस टैक्स गैप को कम किया जाए, तो भारत का अपना पैसा देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में और तेजी से लग सकेगा।
