Kiwi और Yes Bank की नई पेशकश: अब UPI पर पाएं ₹50,000 तक की क्रेडिट लाइन!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Kiwi और Yes Bank की नई पेशकश: अब UPI पर पाएं ₹50,000 तक की क्रेडिट लाइन!

फिनटेक कंपनी Kiwi ने Yes Bank के साथ मिलकर एक नई सुविधा शुरू की है, जिसके तहत UPI के ज़रिए **₹50,000** तक की क्रेडिट लाइन (Credit Line) मिलेगी। यह कदम छोटे शहरों में पहली बार क्रेडिट इस्तेमाल करने वालों को टारगेट कर रहा है, हालांकि कंपनी को FY25 में **₹64.2 करोड़** का नेट लॉस (Net Loss) भी हुआ है।

UPI पर मिलेगा ₹50,000 तक का क्रेडिट

फिनटेक स्टार्टअप Kiwi ने Yes Bank के साथ मिलकर 'Kiwi Postpaid' नाम से एक सर्विस लॉन्च की है। इसके ज़रिए ग्राहक ₹50,000 तक की क्रेडिट लिमिट UPI (Unified Payments Interface) के ज़रिए पा सकते हैं। यह सुविधा लोगों को अपनी UPI आईडी से रोज़मर्रा के खर्चों के लिए एक वर्चुअल क्रेडिट लाइन इस्तेमाल करने की आज़ादी देगी, जिससे क्रेडिट कार्ड यूज़र्स के अलावा भी ज़्यादा लोगों तक क्रेडिट की पहुंच आसान हो जाएगी।

पहली बार क्रेडिट यूज़ करने वालों पर फोकस

इस प्रोडक्ट को ऐसे लोगों के लिए बनाया गया है जिनकी कमाई तो ठीक है, लेकिन उनके पास फॉर्मल क्रेडिट कार्ड नहीं है। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि लगभग आधे यूज़र्स क्रेडिट कार्ड की दुनिया में नए हैं। यह सर्विस टियर-II और टियर-III शहरों में ज़्यादा पॉपुलर हो रही है, जहां से 50% यूज़र्स आ रहे हैं। कंपनी का दावा है कि ऑटोमेटेड अप्रूवल प्रोसेस के चलते, 95% योग्य आवेदकों को 2 घंटे के अंदर क्रेडिट लाइन मिल जाती है। यह सर्विस छोटे-मोटे रोज़मर्रा के खर्चों के लिए बेहतर है, न कि बड़े, एकमुश्त खरीदारियों के लिए।

कंपनी की वित्तीय स्थिति

क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने के इस प्रयास के बावजूद, इस बिजनेस मॉडल में शुरुआती फिनटेक कंपनियों की तरह काफी कैश बर्न (Cash Burn) शामिल है। FY25 में Kiwi को ₹64.2 करोड़ का घाटा हुआ। यह डिजिटल लेंडिंग (Digital Lending) के कॉम्पिटिटिव स्पेस में ऑपरेशन्स को बढ़ाने और कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (Customer Acquisition Cost) की चुनौतियों को दिखाता है। निवेशकों के लिए यह देखना ज़रूरी होगा कि कंपनी यूज़र ग्रोथ के साथ-साथ अपनी यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics) और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को कैसे बेहतर बनाती है।

क्रेडिट रिस्क का मैनेजमेंट

UPI ट्रांजैक्शन (Transaction) में क्रेडिट को शामिल करने से कुछ खास तरह के रिस्क भी जुड़े हैं, जिनसे लेंडर्स (Lenders) और यूज़र्स दोनों को निपटना होगा। चूंकि यह सर्विस सीधे पेमेंट ऐप में इंटीग्रेटेड है, इसलिए अगर यूज़र अपने कर्ज को ठीक से मैनेज नहीं करते तो वे ज़्यादा खर्च कर सकते हैं। रोज़मर्रा के खर्चों के लिए क्रेडिट लाइन पर निर्भरता का मतलब है कि समय पर पेमेंट न करने पर यूज़र के क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ सकता है।

सेक्टर की बात करें तो, 'क्रेडिट लाइन ऑन UPI' (CLOU) सेगमेंट रेगुलेटरी (Regulatory) निगरानी में है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और NPCI डिजिटल लेंडिंग और ट्रांजैक्शन चार्जेज़ (Transaction Charges) से जुड़े नियमों को लगातार बेहतर बना रहे हैं। Kiwi और उसके पार्टनर बैंकों का फ्यूचर ग्रोथ, एसेट क्वालिटी (Asset Quality) बनाए रखने, उधारकर्ताओं के लिए ब्याज लागत (Interest Cost) मैनेज करने और डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) के भविष्य के रेगुलेटरी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.