रेटिंग बढ़ी, पर क्या है असली चिंता?
Kissht की पूरी तरह से अपनी मालिकाना हक वाली NBFC, Si Creva Capital Services, को Crisil Ratings ने अपनी क्रेडिट रेटिंग BBB+/Stable से बढ़ाकर A-/Stable कर दिया है। यह अपग्रेड कंपनी के मजबूत बिजनेस मोमेंटम, बेहतर पूंजीकरण (capitalisation) और विशेष रूप से बढ़ते हुए एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के कारण हुआ है।
AUM में तूफानी उछाल
सितंबर 2025 तक, Si Creva Capital Services का AUM बढ़कर ₹5,533 करोड़ हो गया, जो पिछले साल मार्च में ₹4,087 करोड़ था। यह वृद्धि मुख्य रूप से कंपनी के असुरक्षित पर्सनल लोन (unsecured personal loan) पोर्टफोलियो से प्रेरित है। Crisil ने Kissht के स्केलेबल डिजिटल लेंडिंग मॉडल, अनुशासित अंडरराइटिंग (underwriting) प्रथाओं और मजबूत कैपिटल कुशन की भी सराहना की है।
डिजिटल लेंडिंग का बूम और उसके खतरे
भारत का डिजिटल लेंडिंग मार्केट अभी विस्फोटक ग्रोथ के दौर से गुजर रहा है। अनुमान है कि 2030 तक इसका बाजार $2,454.4 मिलियन तक पहुंच सकता है, जो 2025 से 2030 तक 31.5% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। पूरा भारतीय फिनटेक मार्केट 2025 में $111.14 बिलियन का था और इसके भी तेजी से विस्तार की उम्मीद है।
Si Creva इसी डायनामिक माहौल में काम करती है। हालांकि, असुरक्षित लोन सेगमेंट पर इसकी भारी निर्भरता नियामकों (regulators) का ध्यान खींच रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले ही असुरक्षित लोन पर रिस्क वेट (risk weights) बढ़ा दिए हैं, जो संभावित ओवरहीटिंग और डिफॉल्ट रिस्क की चिंता को दर्शाते हैं। यह स्थिति, रेटिंग अपग्रेड के बावजूद, एसेट क्वालिटी बनाए रखने में एक चुनौती पेश करती है।
कंपनी के नतीजों और भविष्य की राह
रेटिंग अपग्रेड के बावजूद, Kissht के लिए कई बड़े रिस्क बने हुए हैं। कंपनी का असुरक्षित पर्सनल लोन पर ज़ोर एक बड़ी चिंता है, जिसे नियामक और विश्लेषक दोनों ही संभावित तनाव का क्षेत्र मानते हैं।
फाइनेंशियल ईयर (FY) 25 के अंत तक, Kissht के ऑपरेटर OnEMI Technology Solutions ने नेट प्रॉफिट में 18.56% की गिरावट दर्ज की, जो FY24 के ₹197.2 करोड़ से घटकर ₹160.6 करोड़ रह गया। इसी अवधि में रेवेन्यू भी 20% से ज़्यादा गिरा। यह प्रदर्शन असुरक्षित लेंडिंग मॉडल की अस्थिरता को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और यील्ड प्रेशर के कारण मार्जिन विस्तार की स्थिरता पर सवाल उठ सकते हैं। ICRA ने भी संकेत दिया है कि निकट भविष्य में असुरक्षित सेगमेंट में एसेट क्वालिटी पर दबाव पड़ सकता है।
IPO पर क्या होगा असर?
कंपनी ₹1,000 करोड़ के फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए IPO लाने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए SEBI ने जनवरी 2026 में मंजूरी दे दी है। अगर बाज़ार का सेंटिमेंट असुरक्षित लेंडिंग स्पेस में जोखिमों के कारण नकारात्मक होता है, तो IPO पर असर पड़ सकता है।
भविष्य में, Kissht की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कैसे टाइट हो रहे रेगुलेटरी माहौल को नेविगेट करती है, अपने असुरक्षित पोर्टफोलियो में क्रेडिट कॉस्ट को प्रभावी ढंग से मैनेज करती है, और भीड़ भरे बाजार में खुद को अलग पहचान दिलाती है।