Karnataka Bank ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार नतीजों का ऐलान किया है। बैंक का नेट प्रॉफिट **43%** बढ़कर **₹419 करोड़** हो गया है। एसेट क्वालिटी में सुधार और टोटल एडवांसेस में **17%** की ग्रोथ ने इस प्रदर्शन को सपोर्ट किया है।
मुनाफे में 43% का जोरदार इजाफा
कर्नाटक बैंक ने 2026-27 के वित्तीय वर्ष की शुरुआत दमदार की है। बैंक ने 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹418.95 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹292.40 करोड़ की तुलना में 43.28% अधिक है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ, बैंक का कुल बिज़नेस ₹1,97,006.62 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया।
ब्याज से कमाई और मार्जिन में सुधार
इस बेहतरीन नतीजों के पीछे बैंक की ब्याज से होने वाली आय में बढ़ोतरी एक बड़ा कारण रही। जहाँ तक नेट इंटरेस्ट इनकम (लोन पर अर्जित ब्याज और डिपॉजिट पर दिए गए ब्याज का अंतर) की बात है, तो यह ₹755.60 करोड़ से बढ़कर ₹938.29 करोड़ हो गई। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), जो लोन से होने वाली प्रॉफिटेबिलिटी का पैमाना है, 2.82% से सुधरकर 3.20% पर पहुंच गया। इससे पता चलता है कि बैंक अपनी फंड की लागत की तुलना में लोन पर बेहतर रिटर्न अर्जित करने में सफल रहा है।
लोन और डिपॉजिट में ग्रोथ, CASA का बेहतर मिश्रण
बैंक की लोन देने की क्षमता भी बढ़ी है, जिसमें ग्रॉस एडवांसेज़ 17% की बढ़ोतरी के साथ ₹86,610.21 करोड़ तक पहुंच गए। दूसरी ओर, टोटल डिपॉजिट 7% बढ़कर ₹1,10,396.41 करोड़ हो गया। सबसे खास बात यह है कि सस्ते माने जाने वाले करंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) डिपॉजिट का हिस्सा 30.84% से सुधरकर 32.42% हो गया है। CASA डिपॉजिट बैंकों को अपनी उधारी की लागत को कम रखने में मदद करते हैं।
एसेट क्वालिटी में सुधार और मजबूत कैपिटल
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू बैंक के बैड लोंस (NPA) की स्थिति होती है। कर्नाटक बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) इस तिमाही में घटकर 2.58% पर आ गए, जो जून 2025 में 3.46% थे। इसी तरह, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) भी पिछले साल के 1.44% से कम होकर 0.87% पर आ गए। ये आंकड़े बैंक के लोन पोर्टफोलियो में सुधार और रिकवरी प्रक्रियाओं की प्रभाविता को दर्शाते हैं।
इसके अलावा, बैंक ने मजबूत कैपिटल बफर बनाए रखा है। 30 जून, 2026 तक बैंक का कैपिटल-टू-रिस्क एसेट रेशियो (CRAR) 21.10% रहा। यह अनुपात बैंक की वित्तीय मजबूती और संभावित नुकसानों को झेलने की क्षमता को मापता है। 21% से ऊपर का स्तर आमतौर पर मजबूत माना जाता है।
आगे क्या?
आगे चलकर, निवेशकों को बैंक की प्रॉफिट मार्जिन और एसेट क्वालिटी को बदलते इंटरेस्ट रेट माहौल में बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखनी होगी। बैंक ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर ज़ोर देने की बात कही है, जिससे आने वाली तिमाहियों में ऑपरेशनल कॉस्ट पर पड़ने वाले प्रभाव को ट्रैक करना एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा।
