Julius Baer India के रुपेन राजगुरु ने आगाह किया है कि कमजोर मानसून और बढ़ते कच्चे तेल के दाम देश में महंगाई को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, वे प्राइवेट बैंकों को लेकर सकारात्मक हैं, लेकिन IT सेक्टर में सुधार के लिए उन्होंने **1 से 2 साल** तक के इंतजार की सलाह दी है।
महंगाई का नया संकट
Julius Baer India में इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स और स्ट्रैटेजी के हेड, रुपेन राजगुरु के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य से 14% कम रहना चिंता का विषय है। अगर मानसून की कमी से फूड इन्फ्लेशन बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार और RBI के लिए महंगाई को काबू में रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
RBI का रुख और लिक्विडिटी
इन दबावों के बावजूद, ऐसी उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। RBI का मुख्य फोकस रेपो रेट के बजाय लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर रहने की संभावना है। मौजूदा समय में सिस्टम में लगभग ₹10 लाख करोड़ की लिक्विडिटी मौजूद है, जो किसी भी बड़े झटके को सोखने के लिए एक मजबूत बफर का काम कर रही है।
बैंकों पर दांव, IT पर सतर्कता
निवेशकों के लिए प्राइवेट सेक्टर के बैंक एक बेहतर विकल्प बने हुए हैं। इन बैंकों में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत है और फंड्स की स्थिति भी आरामदायक है। FCNR-B डिपॉजिट्स में हुए इनफ्लो ने शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट रेट्स को कम करने में मदद की है, जिससे बैंकों ने अपने MCLR में कटौती की है। इसका सीधा फायदा लोन की मांग को मिल रहा है।
वहीं दूसरी ओर, IT सेक्टर को लेकर नजरिया थोड़ा सुस्त है। हालांकि कंपनियां आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम कर रही हैं, लेकिन इसके नतीजे फिलहाल pricing pressure और प्रतिस्पर्धा को मात देने के लिए काफी नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि इस सेक्टर में दमदार रिकवरी देखने में अभी 12 से 24 महीने का समय लग सकता है।
