Julius Baer का बड़ा दांव: भारत में बिजनेस दोगुना करने की तैयारी, छोटे शहरों में भी दस्तक

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Julius Baer का बड़ा दांव: भारत में बिजनेस दोगुना करने की तैयारी, छोटे शहरों में भी दस्तक

ग्लोबल वेल्थ मैनेजर जूलियस बेयर (Julius Baer) अगले पांच सालों में भारत में अपने ऑपरेशंस को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। कंपनी अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छोटे उभरते हुए वेल्थ सेंटर्स तक पहुंचने के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपना रही है।

जूलियस बेयर की नई ग्रोथ स्ट्रैटेजी

स्विट्जरलैंड की वेल्थ मैनेजमेंट फर्म जूलियस बेयर (Julius Baer) ने भारत में अपने बिजनेस को लेकर एक आक्रामक ग्रोथ स्ट्रैटेजी का खुलासा किया है। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच सालों में देश में अपनी मौजूदगी को दोगुना करना है। इस योजना के तहत, फर्म पारंपरिक बड़े मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर, छोटे लेकिन तेज़ी से बढ़ते शहरों में भी अपनी पैठ बनाने की तैयारी कर रही है। यह कदम भारतीय बाज़ार में फर्म के अप्रोच में एक बड़ा बदलाव लाता है, जो कि इसके ग्लोबल ऑपरेशंस के लिए एक अहम फोकस रहा है।

हब-एंड-स्पोक मॉडल से होगा विस्तार

इस स्ट्रैटेजी को अमली जामा पहनाने के लिए, कंपनी हब-एंड-स्पोक मॉडल की ओर बढ़ रही है। मुंबई में अपने हेड ऑफिस पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, फर्म अब पुणे और जयपुर जैसे रीजनल सेंटर्स का इस्तेमाल करेगी। इन सेंटर्स से कंपनी अपने ऑपरेशंस को मैनेज करेगी और आसपास के इलाकों के ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करेगी। इस मॉडल का उद्देश्य रिसोर्सेज को एक साथ लाना, ग्राहकों तक बेहतर पहुंच बनाना और स्थानीय क्षमताओं को मज़बूत करना है। यह कदम फर्म के हालिया प्रयासों के अनुरूप है, जिसमें मुंबई के अंधेरी ईस्ट में एक बड़े ऑफिस का विस्तार भी शामिल है ताकि बढ़ते कर्मचारियों की संख्या को संभाला जा सके।

HNIs के बदलते निवेश पैटर्न का फायदा

यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के निवेश के तरीके बदल रहे हैं। जूलियस बेयर के मुताबिक, उसके क्लाइंट्स के बीच ऑफशोर इन्वेस्टमेंट यानी विदेशी संपत्तियों में निवेश का हिस्सा 5-7% से बढ़कर 10-15% हो गया है, और कुछ परिवार तो 20% तक निवेश कर रहे हैं। जूलियस बेयर अपनी ग्लोबल मौजूदगी का फायदा उठाना चाहता है, खासकर सिंगापुर, हांगकांग, दुबई और स्विट्जरलैंड जैसे इंटरनेशनल फाइनेंशियल हब्स में, ताकि वह भारतीय निवासियों (Resident Indians) और प्रवासी भारतीयों (NRIs) की विदेशी निवेश और डाइवर्सिफिकेशन की मांग को पूरा कर सके।

नेतृत्व परिवर्तन और चुनौतियाँ

वर्तमान में, जूलियस बेयर का भारतीय बिजनेस एक लीडरशिप और ऑर्गनाइजेशनल ट्रांज़िशन के दौर से गुज़र रहा है। मई 2026 में, कुणाल सुमाया को अंतरिम इंडिया कंट्री हेड नियुक्त किया गया था, जब उनके पूर्ववर्ती ने फर्म छोड़ दिया था। यह नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय में हुआ है जब कंपनी एक प्रतिस्पर्धी वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर में अपने ऑपरेशंस को स्थिर करने और अपनी टीम का विस्तार करने के लिए काम कर रही है।

बाज़ार की चुनौतियां

हालांकि फर्म अपनी ग्रोथ को लेकर आशावादी है, लेकिन भारत का वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी इंडस्ट्री-व्यापी जोखिमों को कितनी अच्छी तरह मैनेज कर पाती है। इनमें रिलेशनशिप मैनेजर्स के बीच हाई टर्नओवर रेट और क्रॉस-बॉर्डर इन्वेस्टमेंट से जुड़े रेगुलेटरी कंप्लायंस की जटिलताएं शामिल हैं। इसके अलावा, बाज़ार की अस्थिरता भी बिज़नेस पर असर डाल सकती है, जिससे क्लाइंट एक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। ग्लोबल जूलियस बेयर ग्रुप ने 2026 की पहली छमाही में CHF 673 मिलियन का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन स्थानीय इकाई को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इन विशिष्ट ऑपरेशनल बाधाओं से निपटना होगा।

आगे की राह

भविष्य में, इंडस्ट्री के जानकार नए हब-एंड-स्पोक मॉडल की प्रभावशीलता पर नज़र रखेंगे और यह देखेंगे कि क्या फर्म उभरते शहरों में अपनी टीम को सफलतापूर्वक स्केल कर पाती है। मुख्य बात यह होगी कि कंपनी प्रतिस्पर्धी टैलेंट मार्केट और वेल्थ एडवाइजरी के लिए कड़े हो रहे रेगुलेटरी नियमों से कैसे निपटती है, और साथ ही इस ग्रोथ फेज के दौरान सर्विस स्टैंडर्ड्स को कैसे बनाए रखती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.