$1 अरब का ऑफ़शोर लोन: एक बड़ी राहत
Jindal Power Ltd. ने अपनी ग्लोबल महत्वाकांक्षाओं को पंख लगाने के लिए $1 अरब तक का ऑफ़शोर लोन हासिल कर लिया है। कंपनी के बोत्सवाना (Botswana) में एक बड़े पावर प्रोजेक्ट सहित अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं को इस फंड से बल मिलेगा। इस डील का पहला $500 मिलियन का हिस्सा, जो कि आठ साल की अवधि का है, Axis Bank Ltd. और ICICI Bank Ltd. जैसे लेंडर्स की भागीदारी के साथ तय हुआ है। बाकी बचे $500 मिलियन आने वाले महीनों में मिलने की उम्मीद है।
यह कदम भारत के डॉलर लोन मार्केट के लिए बेहद ज़रूरी लिक्विडिटी (liquidity) प्रदान करता है। बता दें कि भारतीय कंपनियों ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में $23 अरब का सिंडिकेटेड डॉलर लोन लिया था, लेकिन साल 2026 में यह आंकड़ा घटकर केवल $925 मिलियन रह गया है। Jindal Power के इस पहले ट्रेंच (tranche) को Secured Overnight Financing Rate (SOFR) से लगभग 300 बेसिस पॉइंट ऊपर की कीमत पर लिया गया है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए लगभग ₹8,000 करोड़ का EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) और नेट डेट-नेगेटिव (net debt-negative) पोजीशन का अनुमान लगाया है, हालांकि कंपनी का मार्केट कैप और P/E रेश्यो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
बाज़ार की चुनौती और साथियों की स्थिति
Jindal Power की यह सफल फंडरेज़िंग (fundraising) ऐसे समय में हुई है जब कई भारतीय कंपनियों को विदेशी पूंजी जुटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, Tata Power अपने रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहा है, लेकिन उस पर दिसंबर 2025 तक ₹568.3 बिलियन का लॉन्ग-टर्म डेट था, और FY24 में उसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (debt-to-equity ratio) लगभग 1.6x था। वहीं, Adani Power अपने आक्रामक कोयला विस्तार और भारी कर्ज को लेकर क्रेडिट एजेंसियों की जांच के दायरे में है। Adani Power का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में $10 अरब जुटाना है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड जुटाना अधिक जटिल हो गया है। Adani Energy Solutions ने दिसंबर 2025 तक $1.32 अरब का कर्ज दिखाया है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.59 है।
साल 2026 में ट्रेड प्रोटेक्शनिज़्म (trade protectionism) और करेंसी की अस्थिरता के बढ़ते माहौल के कारण 70% भारतीय कंपनियां क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड (cross-border trade) में ज़्यादा मुश्किलें महसूस कर रही हैं।
जोखिम और चिंताएं
हालांकि Jindal Power की फाइनेंशियल हेल्थ मजबूत दिख रही है, नेट डेट-नेगेटिव पोजीशन और अच्छी लिक्विडिटी के साथ, लेकिन बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स, खासकर बोत्सवाना जैसे बाजार में, में एग्जीक्यूशन (execution) और भू-राजनीतिक जोखिम (geopolitical risks) हमेशा बने रहते हैं। डॉलर डेट मार्केट में भारतीय कंपनियों के सामने आ रही बाधाएं भविष्य की स्थिरता पर सवाल उठा सकती हैं, अगर वैश्विक परिस्थितियां और खराब होती हैं।
डील में शामिल बैंक Axis Bank और ICICI Bank के लिए भी संभावित जोखिमों में लेंडिंग एक्सपोजर (lending exposure) का केंद्रीकरण और विदेशी प्रोजेक्ट्स की क्रेडिट योग्यता शामिल है। Axis Bank की कॉन्टिनजेंट लायबिलिटीज (contingent liabilities) ₹29,55,132 करोड़ और इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (interest coverage ratio) कम है। ICICI Bank पर ₹80,16,362 करोड़ की कॉन्टिनजेंट लायबिलिटीज और कम इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो है, साथ ही ₹1.51 करोड़ की संभावित देनदारी वाला एक GST विवाद भी है। इन दोनों बैंकों की कमाई में 'अन्य आय' (other income) का बड़ा योगदान भी जांच का विषय है।
आगे का रास्ता
जहां तक शामिल बैंकों की बात है, विश्लेषकों का नज़रिया फिलहाल सकारात्मक है। ICICI Bank के लिए 97.37% विश्लेषकों ने 'Buy' रेटिंग दी है, और हाल ही में MarketsMOJO ने इसकी रेटिंग को 'Hold' में अपग्रेड किया है। Axis Bank के आउटलुक को Fitch ने 'positive' बताया है और कुछ एनालिस्ट इसे अंडरवैल्यूड (undervalued) मान रहे हैं।
हालांकि ICICI Bank के रेवेन्यू में सालाना 2.8% की गिरावट का अनुमान है, लेकिन इसकी कमाई 10.4% बढ़ने की उम्मीद है। Jindal Power के लिए, अपने अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करना और अपनी फाइनेंसिंग स्ट्रक्चर का समझदारी से प्रबंधन करना, इस लगातार जटिल होते वैश्विक वित्तीय माहौल में भविष्य के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।