जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) ने PNB MetLife India Insurance में अपनी 0.5% हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है। इस सौदे से बैंक को **₹120.1 करोड़** मिलेंगे। इस बिकवाली के बाद इंश्योरेंस कंपनी में बैंक की कुल हिस्सेदारी घटकर **2.534%** रह जाएगी। यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल J&K Bank का शेयर **80%** से ज़्यादा उछल चुका है।
J&K Bank बेच रही हिस्सेदारी
जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) ने बाज़ार को बताया है कि वो PNB MetLife India Insurance Company में अपनी 0.5% हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस डील के तहत, बैंक 1.025 करोड़ इक्विटी शेयर ₹117.20 प्रति शेयर के भाव पर बेच रहा है। इस सौदे की कुल वैल्यू ₹120.1 करोड़ है। MetLife International Holdings, LLC इस हिस्सेदारी को खरीदेगी। इस डील के पूरा होने के बाद, J&K Bank की PNB MetLife में हिस्सेदारी 3.034% से घटकर 2.534% रह जाएगी।
डील को कब मिली मंज़ूरी?
हालांकि इस बात की जानकारी 14 जुलाई, 2026 को सार्वजनिक की गई, लेकिन बैंक के बोर्ड ने इस हिस्सेदारी की बिक्री को 20 जनवरी, 2026 को ही हरी झंडी दे दी थी। बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में साफ किया है कि इस ट्रांज़ैक्शन में कोई भी संबंधित पक्ष (related party) शामिल नहीं है और न ही इससे PNB MetLife के मैनेजमेंट कंट्रोल में कोई बदलाव आएगा। डील को अंतिम रूप देने के लिए फाइनल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर और ज़रूरी रेगुलेटरी क्लीयरेंस की ज़रूरत होगी।
शेयर का शानदार प्रदर्शन
बैंक के शेयर में इस साल ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली है। 15 जुलाई, 2026 तक, शेयर की कीमत साल की शुरुआत से 80% से ज़्यादा बढ़ चुकी है। इसकी तुलना में, बेंचमार्क Nifty50 इंडेक्स में इसी अवधि में करीब 8% की गिरावट आई है। हाल ही में, 10 जुलाई, 2026 को शेयर ने अपना 52-हफ्ते का हाई ₹201.75 का स्तर छुआ था।
मार्केट की नज़रें
फिलहाल, बैंक का शेयर अपने ऐतिहासिक हाई के करीब कंसॉलिडेट होता दिख रहा है। टेक्निकल जानकारों का मानना है कि शेयर को ₹195 के लेवल पर रेसिस्टेंस (resistance) मिल रहा है, जो 2014 का भी एक अहम पीक था। अब देखना होगा कि क्या शेयर इस लेवल के ऊपर लगातार क्लोजिंग दे पाता है या फिर इस ऊंचाई पर प्रॉफिट-बुकिंग (profit-booking) देखने को मिलती है।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए, यह बिकवाली नॉन-कोर एसेट्स (non-core assets) से वैल्यू निकालने का एक कदम है। भले ही ₹120.1 करोड़ की यह रकम बैंक के बड़े बैलेंस शीट के मुकाबले कम है, लेकिन इस तरह के कदम कैपिटल बफर (capital buffer) बढ़ाने या लिक्विडिटी (liquidity) सुधारने के लिए उठाए जाते हैं। शेयरहोल्डर्स के लिए अब यह देखना ज़रूरी होगा कि यह डील कैसे पूरी होती है और बैंक इस पैसे का इस्तेमाल कैसे करेगा। इसके अलावा, आने वाली तिमाही नतीजों में बैंक की एसेट क्वालिटी (asset quality) और क्रेडिट ग्रोथ (credit growth) पर भी नज़रें रहेंगी।
