जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) ने पहली तिमाही में अपने रिटेल क्रेडिट बिज़नेस में शानदार **2** गुना की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अब **₹1,400 करोड़** पर पहुंच गया है। बैंक के CEO अमितव चटर्जी ने बताया कि कृषि लोन में भी **3** गुना की बढ़ोतरी हुई है, जो जम्मू-कश्मीर में आर्थिक सुधार के बड़े संकेत हैं।
रिटेल बिज़नेस में 2 गुना की बढ़ोतरी
जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) के हालिया आंकड़े जम्मू-कश्मीर में लोन की मांग में ज़बरदस्त उछाल का इशारा कर रहे हैं। पहली तिमाही में, बैंक के रिटेल क्रेडिट बिज़नेस ने ₹1,400 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹700 करोड़ था। मैनेजमेंट का कहना है कि यह बढ़ोतरी, कृषि लोन में 3 गुना इज़ाफे यानी ₹3,000 करोड़ के साथ मिलकर, इस क्षेत्र में मज़बूत आर्थिक गतिविधि को दर्शाती है।
CEO की नज़र में आर्थिक सुधार
MD और CEO अमितव चटर्जी के अनुसार, यह लोन ग्रोथ बिज़नेस के प्रति बढ़ते विश्वास को दिखाता है। बैंक पारंपरिक रूप से स्थानीय लोन पैटर्न को J&K की अर्थव्यवस्था के बैरोमीटर के तौर पर इस्तेमाल करता है। लोन की मांग में यह तेज़ी बताती है कि स्थानीय बिज़नेस और किसानों को कमाई के नए अवसर मिल रहे हैं। यह स्थिति पिछले साल के मुकाबले काफी अलग है, जब सुरक्षा संबंधी घटनाओं के कारण व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन में सुस्ती देखी गई थी।
बागवानी (Horticulture) और भविष्य की चिंताएं
हालांकि, वर्तमान लोन ग्रोथ के आंकड़े सकारात्मक हैं, लेकिन बैंक का मैनेजमेंट आने वाले महीनों पर नज़र रखे हुए है ताकि इस ट्रेंड की मज़बूती को परखा जा सके। J&K की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बागवानी, खासकर सेब की फसल पर निर्भर करता है। बैंक अब मंडियों में पहुंचने वाली इन फसलों की कीमतों और एक्सपोर्ट पर नज़र रखेगा। इस सीज़न की सफलता कृषि लोन लेने वालों की चुकाने की क्षमता और बैंक के ग्रामीण पोर्टफोलियो की एसेट क्वालिटी के लिए अहम साबित होगी।
निवेशकों के लिए मुख्य बिंदु
निवेशकों के लिए सबसे ज़रूरी बात यह देखना होगी कि लोन की यह मांग एसेट क्वालिटी में कैसे बदलती है। जैसे-जैसे बैंक रिटेल और कृषि क्षेत्र में अपना एक्सपोजर बढ़ा रहा है, आने वाली तिमाही रिपोर्टों में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। बैंक की क्षमता, रिस्क मैनेजमेंट से समझौता किए बिना ग्रोथ बनाए रखने की, यह तय करेगी कि वह इस क्षेत्र की आर्थिक रिकवरी का कितना फायदा उठा पाता है।
