जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ₹3.04 लाख करोड़ के बिजनेस का आंकड़ा पार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि बैंक के 88 साल के इतिहास में एक अहम पड़ाव है।
बिजनेस में आई तूफानी तेजी
J&K Bank के कुल बिजनेस ने ₹3 ट्रिलियन का आंकड़ा पार कर लिया है। बैंक ने पहली तिमाही के अंत में ₹3.04 लाख करोड़ का कुल बिजनेस दर्ज किया। इस जबरदस्त ग्रोथ के पीछे बैंक की जमा (Deposits) में 16% की सालाना वृद्धि और ग्रॉस एडवांंसेस (Gross Advances) में 25% का बड़ा उछाल रहा। नतीजतन, जमा राशि बढ़कर ₹1.73 लाख करोड़ और एडवांंसेस ₹1.31 लाख करोड़ तक पहुंच गए।
ग्रोथ की रफ्तार हुई तेज
बैंक के मैनेजमेंट ने बताया कि ₹3 ट्रिलियन के इस आंकड़े तक पहुंचने की रफ्तार पहले से काफी तेज हो गई है। पिछले 3 सालों में बैंक ने ₹2 ट्रिलियन से ₹3 ट्रिलियन का सफर तय किया, जबकि ₹1 ट्रिलियन से ₹2 ट्रिलियन तक पहुंचने में बैंक को लगभग एक दशक लगा था। एमडी और सीईओ अमितवा चटर्जी ने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि बैंक अब एक बदला हुआ संस्थान है, जिसका बिजनेस मॉडल ज्यादा फुर्तीला है और हालिया रणनीतिक बदलावों का असर दिख रहा है।
'विजन 2030' पर फोकस
यह ₹3 ट्रिलियन का माइलस्टोन बैंक की 'विजन 2030' स्ट्रेटेजी का अहम हिस्सा है। बैंक का लक्ष्य 2030 तक कुल बिजनेस को ₹5 ट्रिलियन तक ले जाना और सालाना ₹5,000 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाना है। पिछले 4 फाइनेंशियल ईयर (FY2025-26 तक) में लगातार रिकॉर्ड तोड़ मुनाफे के बाद, बैंक अब आक्रामक ग्रोथ के साथ-साथ मजबूत लेंडिंग प्रैक्टिस और स्थिर एसेट क्वालिटी पर भी ध्यान दे रहा है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
निवेशकों के लिए बैंक की यह टर्नअराउंड स्टोरी खास है। 2019-20 के दौर में एसेट क्वालिटी की चुनौतियों का सामना करने के बाद, बैंक ने अपने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) को कम करने पर जोर दिया है। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि बैंक की एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार हो रहा है। बैंक हेल्दी प्रोविजनिंग लेवल्स बनाए रखने और स्लिपेज (Slippages) को कंट्रोल में रखने पर फोकस कर रहा है। बैंक ने यह भी साफ किया है कि जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ेगा, वैसे-वैसे गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट के उच्च मानकों का पालन जारी रहेगा।
निवेशकों के लिए ट्रैक करने लायक बातें
जमा और एडवांंस में ग्रोथ के ये आंकड़े तो शानदार हैं, लेकिन निवेशक कुछ खास बातों पर नजर रखेंगे। पहला, कॉम्पिटिटिव डिपॉजिट माहौल में बैंक अपनी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को कितना बनाए रख पाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। दूसरा, एसेट क्वालिटी को कंट्रोल में रखते हुए क्रेडिट ग्रोथ को जारी रखना शेयरधारकों के लिए मुख्य फोकस रहेगा। और तीसरा, जैसे-जैसे बैंक अपने घरेलू क्षेत्र से बाहर विस्तार करेगा, वैसे-वैसे वह अपनी कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy) और ऑपरेशनल खर्चों को कैसे मैनेज करता है, यह देखना अहम होगा।
