Jana Small Finance Bank Share: प्रमोटर की हिस्सेदारी बिक्री और मर्जर की खबरों से स्टॉक में उछाल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Jana Small Finance Bank Share: प्रमोटर की हिस्सेदारी बिक्री और मर्जर की खबरों से स्टॉक में उछाल

गुरुवार को Jana Small Finance Bank के शेयरों में करीब **2.5%** की तेजी देखी गई। यह उछाल प्रमोटर Jana Holdings द्वारा अपनी लगभग **7%** हिस्सेदारी बेचने की रिपोर्ट के बाद आया है। इस बिक्री का मकसद Jana Holdings की हिस्सेदारी **10%** से नीचे लाना और TPG Asia के **₹700 करोड़** के कर्ज को चुकाना है। साथ ही, प्रमोटर किसी अन्य स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ मर्जर की संभावनाएं भी तलाश रहा है।

प्रमोटर की हिस्सेदारी बिक्री से क्यों उछले शेयर?

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में Jana Small Finance Bank के शेयरों में करीब 2.5% की बढ़त दर्ज की गई। यह तेजी एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें बताया गया है कि प्रमोटर Jana Holdings लिमिटेड कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम करने की योजना बना रहा है। इस कदम से Jana Holdings की हिस्सेदारी 10% के निशान से नीचे आ जाएगी, जिससे यह प्रमोटर स्टेटस से बाहर हो सकता है।

₹700 करोड़ के कर्ज़ से मुक्ति की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Jana Holdings, Jana Small Finance Bank में अपनी करीब 7% हिस्सेदारी बेचेगा। इस बिक्री से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल सिंगापुर की प्राइवेट इक्विटी फर्म TPG Asia को चुकाए जाने वाले लगभग ₹700 करोड़ के कर्ज को निपटाने के लिए किया जाएगा। यह कदम होल्डिंग कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए बेहद ज़रूरी है।

मर्जर की भी तलाश जारी

बाजार की दिलचस्पी इस बात से और बढ़ गई है कि Jana Holdings, Jana Small Finance Bank का किसी अन्य स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ मर्जर करने की संभावनाओं का भी मूल्यांकन कर रहा है। यह कदम वित्तीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर एकीकरण या विस्तार की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

कर्ज़ के री-स्ट्रक्चरिंग से मिली राहत

इस बीच, TPG Asia ने 30 जून को Jana Holdings के लोन की मैच्योरिटी को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। इससे होल्डिंग कंपनी को प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री और अपनी रणनीतिक योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। हालांकि, Jana Small Finance Bank और TPG Asia ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जबकि Jana Holdings की ओर से जवाब का इंतज़ार है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब India Ratings & Research ने Jana Capital की नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCD) की अवधि बढ़ाने के कारण उसकी रेटिंग डाउनग्रेड कर दी थी। रेटिंग एजेंसी ने पहले भी बताया था कि Jana Holdings और Jana Capital, दोनों नॉन-ऑपरेटिंग एंटिटीज़ हैं और मुख्य रूप से Jana Small Finance Bank में अपनी हिस्सेदारी के ज़रिए ही कर्ज चुकाने या डेट रीफाइनेंसिंग पर निर्भर हैं।

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