Jana Small Finance Bank के दूसरी तिमाही के नतीजे दमदार रहे हैं। बैंक का मुनाफा पिछले साल के ₹75 करोड़ से बढ़कर ₹170 करोड़ हो गया है, जबकि कंपनी अब रिस्क कम करने के लिए अनसिक्योर्ड लोन के बजाय सिक्योर्ड लेंडिंग पर फोकस बढ़ा रही है।
मुनाफे में जोरदार बढ़त
Jana Small Finance Bank ने सितंबर में खत्म हुई दूसरी तिमाही के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बैंक का नेट प्रॉफिट पिछले साल के इसी दौर में ₹75 करोड़ था, जो इस बार बढ़कर ₹170 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। बैंक की कोर आय यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 35% की बढ़ोतरी हुई है, जो अब ₹819 करोड़ हो गई है। नतीजों के बाद बैंक ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए अपनी प्रॉफिट ग्रोथ गाइडेंस को 100% (YoY) रहने का अनुमान दिया है।
सिक्योर्ड लोन पर दांव
बैंक अपनी रिस्क प्रोफाइल को सुधारने के लिए एक बड़ी रणनीति पर काम कर रहा है। बैंक अब अनसिक्योर्ड लोन से हटकर सिक्योर्ड लेंडिंग (प्रॉपर्टी या व्हीकल बैक लोन) पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो 22% बढ़कर ₹38,752 करोड़ हो गया है। फिलहाल बैंक के कुल लोन बुक में सिक्योर्ड लोन की हिस्सेदारी 73.7% है, जिसे बैंक आने वाले समय में 80% तक ले जाना चाहता है।
मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार
ऑपरेशनल फ्रंट पर बैंक ने अच्छा सुधार दिखाया है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछले साल के 6.5% से बढ़कर 7.5% पर पहुंच गया है। वहीं, एसेट क्वालिटी की बात करें तो ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) रेशियो पिछले साल के 2.8% से घटकर 2.17% रह गया है, जो लोन बुक मैनेजमेंट में सुधार को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Watchlist)
बैंक के CASA रेशियो में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है, जो 18.3% से घटकर 17.6% रह गया है। इसका मतलब है कि बैंक अब अपने कामकाज के लिए महंगे टर्म डिपॉजिट्स पर ज्यादा निर्भर है। इसके अलावा, दिसंबर तिमाही में नेट NPA को 1% से नीचे लाने का लक्ष्य ₹68 करोड़ के क्रेडिट गारंटी क्लेम्स मिलने पर टिका है। निवेशकों की नजरें अब इन क्लेम्स के समय पर मिलने पर टिकी होंगी।
