Jana Small Finance Bank: RBI की जांच में सामने आए ज्यादा NPA, बैंक ने FY27 पर कहा - कोई असर नहीं

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Jana Small Finance Bank: RBI की जांच में सामने आए ज्यादा NPA, बैंक ने FY27 पर कहा - कोई असर नहीं

Jana Small Finance Bank ने शेयरधारकों को सूचित किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2025 के लिए बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) की समीक्षा में कुछ भिन्नताएं पाई हैं। खास बात यह है कि बैंक ने इन अतिरिक्त प्रोविजन्स (Provisions) को FY26 में ही एडजस्ट कर लिया है, जिससे FY27 के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

Detailed Coverage

क्या है एसेट क्वालिटी डाइवर्जेंस (Asset Quality Divergence)?

Jana Small Finance Bank ने शेयरधारकों को एक रेग्युलेटरी रिव्यू (Regulatory Review) के बारे में जानकारी दी है। यह रिव्यू भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मार्च 2025 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए बैंक के एसेट क्लासिफिकेशन (Asset Classification) पर किया गया था। इसे एसेट क्वालिटी डाइवर्जेंस कहते हैं, जब केंद्रीय बैंक को लगता है कि बैंक द्वारा खराब लोन (Bad Loans) का आंकलन, बैंक के अपने आंकलन से अलग है।

RBI की जांच में क्या खुला?

बैंक की फाइलिंग के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक, RBI ने बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPAs) का आंकड़ा ₹919 करोड़ बताया है। यह वह आंकड़ा है जो बैंक ने अपनी एनुअल अकाउंट्स (Annual Accounts) में ₹750 करोड़ रिपोर्ट किया था। इसी तरह, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Net NPAs) के मामले में भी अंतर पाया गया, जिसे रेगुलेटर ने ₹537 करोड़ आंका, जबकि बैंक ने ₹495 करोड़ बताए थे। इस अंतर को पाटने के लिए, रेगुलेटर ने बैंक को अतिरिक्त ₹42 करोड़ का प्रोविजन (Provision) बनाने का निर्देश दिया।

बैंक ने स्पष्ट किया है कि अगर ये एडजस्टमेंट्स (Adjustments) वित्तीय वर्ष 2025 में ही कर दिए जाते, तो बैंक का नेट प्रॉफिट ₹501 करोड़ की जगह ₹459 करोड़ रहता। हालांकि, मैनेजमेंट ने पुष्टि की है कि इन जरूरी एडजस्टमेंट्स को वित्तीय वर्ष 2026 के लिए बैंक के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स (Financial Statements) में पूरी तरह से शामिल कर लिया गया है। इन प्रोविजन्स को दर्ज करने के कारण, बैंक को चालू वित्तीय वर्ष 2027 के प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट्स (Profit & Loss Statements) पर किसी और प्रभाव की उम्मीद नहीं है।

भविष्य की योजनाएं और रेगुलेटरी माहौल

यह खुलासा बेंगलुरु स्थित बैंक के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस (Universal Banking License) हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। यूनिवर्सल बैंक बनने के लिए रेगुलेटर द्वारा निर्धारित सख्त मानदंडों को पूरा करना होता है, जिसमें लगातार प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) बनाए रखना और कई वर्षों तक मजबूत एसेट क्वालिटी (Asset Quality) का प्रदर्शन करना शामिल है।

निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि बैंक को पहले भी इसी लाइसेंस के लिए आवेदन करने में एक बाधा का सामना करना पड़ा था, जब रेगुलेटर ने उसका पिछला आवेदन वापस कर दिया था। अप्रैल 2024 में संशोधित दिशानिर्देशों (Revised Guidelines) के जारी होने के बाद, बैंक अपनी आंतरिक प्रणालियों और वित्तीय रिपोर्टिंग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि वह संभावित पुनः आवेदन के लिए पात्रता मानदंडों को पूरा कर सके। भविष्य में, बाजार के जानकार और हितधारक बैंक के तिमाही नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे ताकि उसकी एसेट क्वालिटी में निरंतरता और इन प्रोविजनिंग एडजस्टमेंट्स का बैंक के ओवरऑल कैपिटल रेश्यो (Capital Ratios) और ग्रोथ ट्रैजेक्टरी (Growth Trajectory) पर क्या असर पड़ता है, इसे ट्रैक किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.