Jana SFB के मुनाफे में भारी गिरावट! Q3 में **91%** गिरा प्रॉफिट, पर भविष्य के लिए नए प्लान
Overview
Jana Small Finance Bank (Jana SFB) के निवेशकों के लिए Q3 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। बैंक का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर **91.2%** घटकर सिर्फ **₹9.7 करोड़** रह गया। इसकी मुख्य वजह बढ़ी हुई क्रेडिट प्रोविजनिंग रही। हालांकि, बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) **13.8%** बढ़कर **₹675 करोड़** हो गई और डिपॉजिट्स में **30%** की शानदार ग्रोथ देखी गई। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि नए गारंटी प्रोग्राम्स से FY27 तक RoA में **50-70 bps** का सुधार आ सकता है।
Stocks Mentioned
Jana Small Finance Bank (JSFB) के लिए तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। बैंक का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के ₹110.6 करोड़ की तुलना में 91.2% गिरकर केवल ₹9.7 करोड़ पर आ गया। बैंक के अफसरों के मुताबिक, यह बड़ी गिरावट मुख्य रूप से बढ़ी हुई क्रेडिट प्रोविजनिंग के कारण हुई है, जिसने मुनाफे पर बड़ा असर डाला और यह नतीजों को बैंक की आंतरिक उम्मीदों से भी नीचे ले गया।
इस 'अर्निग शॉक' के बावजूद, बैंक के कोर ऑपरेशन्स में मजबूती दिखी। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 13.8% की बढ़त देखी गई, जो पिछले साल के ₹593 करोड़ से बढ़कर ₹675 करोड़ हो गई। यह दिखाता है कि बैंक की मुख्य आय बनाने की क्षमता मजबूत बनी हुई है। इसी तरह, टोटल डिपॉजिट्स में 30% का तगड़ा इजाफा हुआ और यह ₹33,733 करोड़ तक पहुंच गया। यह बैंक पर ग्राहकों के भरोसे और उसकी लायबिलिटी मैनेजमेंट की क्षमता को दर्शाता है। 6 फरवरी 2026 को बैंक के शेयर 2.28% चढ़कर ₹354 पर बंद हुए।
एसेट क्वालिटी में सुधार, भविष्य के लिए रणनीति
एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर, Jana SFB ने पिछली तिमाही की तुलना में सुधार दिखाया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घटकर 2.59% रह गए, जो पिछली तिमाही में 2.87% थे। वहीं, नेट NPA 0.94% पर स्थिर बने रहे। बैंक के MD और CEO, अजय कवल, ने भरोसा जताया है कि चौथी तिमाही (Q4) से क्रेडिट कॉस्ट में नरमी आने की उम्मीद है, क्योंकि NPA में आने वाले फ्रेश केस कम हो सकते हैं।
भविष्य को देखते हुए, बैंक का फोकस सिक्योर्ड लेंडिंग पर है, जिसमें लगातार ग्रोथ देखी जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि बैंक फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) से कुछ गारंटी प्रोग्राम्स के लिए योग्य हो सकता है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि इन प्रोग्राम्स से बैंक के रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) में 50 से 70 बेसिस पॉइंट्स तक का सुधार देखने को मिल सकता है। यह रणनीति मौजूदा प्रोविजनिंग दबाव से उबरने और बैंक की लाभप्रदता को बढ़ाने में मदद करेगी।