Jana SFB Rating स्थिर, पर मुनाफे में गिरावट और RBI का बड़ा झटका!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Jana SFB Rating स्थिर, पर मुनाफे में गिरावट और RBI का बड़ा झटका!
Overview

Jana Small Finance Bank के लिए रेटिंग तो 'CARE A; Stable' पर स्थिर रही, लेकिन कंपनी के लिए अच्छी खबर ज्यादा नहीं है। जहाँ एक ओर बैंक के **₹75 करोड़** सबऑर्डिनेट डेट पर यह रेटिंग मिली है, वहीं कंपनी के मुनाफे में भारी गिरावट आई है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने यूनिवर्सल बैंक बनने की एप्लीकेशन भी लौटा दी है।

Jana Small Finance Bank: रेटिंग बरकरार, पर वित्तीय सेहत और बड़े सपने मुश्किल में

18 फरवरी, 2026 – Jana Small Finance Bank Limited (JSFBL) के ₹75 करोड़ सबऑर्डिनेट डेट को CARE EDGE Ratings ने 'CARE A; Stable' की रेटिंग दी है, लेकिन यह रेटिंग ऐसे समय आई है जब बैंक मुश्किल वित्तीय हालातों से गुजर रहा है। कंपनी के मुनाफे में गिरावट आई है और रेगुलेटरी मोर्चे पर भी एक बड़ा झटका लगा है।

मुनाफे में भारी गिरावट, एसेट क्वालिटी पर सवाल

बैंक का वित्तीय प्रदर्शन काफी खराब रहा है। Financial Year 2024 (FY24) में ₹670 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) FY25 में घटकर ₹501 करोड़ रह गया, और Financial Year 2026 के पहले नौ महीनों (9MFY26) में यह और गिरकर ₹187 करोड़ पर आ गया। इससे बैंक की एफिशिएंसी पर भी असर पड़ा है, क्योंकि Return on Total Assets (ROTA) FY24 के 2.30% से घटकर 9MFY26 में सिर्फ 0.61% रह गया।

इसकी मुख्य वजह बैंक के माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में आई दिक्कतें हैं, जो बैंक के बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा है। Gross Non-Performing Assets (GNPA), यानी डूबे कर्जों का आंकड़ा FY24 के 2.11% से बढ़कर FY25 में 2.71% और 9MFY26 में 2.59% हो गया। Net Non-Performing Assets (NNPA) भी FY24 के 0.56% से बढ़कर FY25 और 9MFY26 में 0.94% पर पहुँच गया। इन बढ़ते NPA के साथ-साथ क्रेडिट कॉस्ट का बढ़ना और Net Interest Margins (NIMs) का सिकुड़ना (FY24 के 7.31% से घटकर 9MFY26 में 6.19%) सीधे तौर पर मुनाफे पर भारी पड़ा है। ऑपरेटिंग खर्च भी कलेक्शन और रिकवरी पर ज्यादा जोर देने के कारण बढ़े हैं।

इन चुनौतियों के बावजूद, बैंक ने अपनी कैपिटल पोजिशन को ठीकठाक बनाए रखा है। 31 दिसंबर, 2025 तक Capital Adequacy Ratio (CAR) 19.17% था, जो फरवरी 2024 में ₹462 करोड़ के Initial Public Offering (IPO) और Q3FY26 में ₹250 करोड़ का Tier II Capital जुटाने से संभव हुआ।

लोन ग्रोथ धीमी रही, लेकिन बैंक अपने पोर्टफोलियो को स्ट्रैटेजिकली बदल रहा है। 31 दिसंबर, 2025 तक सिक्योर्ड एडवांसेज का हिस्सा बढ़कर 73% हो गया, जो मार्च 2024 में 60% था। इसका मतलब है कि बैंक अब ज्यादा जोखिम वाले माइक्रोफाइनेंस लोन (जो अब पोर्टफोलियो का 27% हैं, पहले 40% थे) से दूरी बना रहा है। कुल डिपॉजिट ₹33,733 करोड़ तक पहुँच गया, लेकिन Current Account Savings Account (CASA) का हिस्सा, जो कम लागत वाले फंड का अहम इंडिकेटर है, लगभग 20% पर ही रहा।

यूनिवर्सल बैंक का सपना अधर में, माइक्रोफाइनेंस पर फोकस

बैंक बनने का जो लंबा सपना था, उसे बड़ा झटका लगा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अक्टूबर 2025 में Jana Small Finance Bank की यूनिवर्सल बैंक बनने की एप्लीकेशन लौटा दी, क्योंकि बैंक निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं कर पाया। बैंक इसे फिर से सबमिट करने की योजना बना रहा है, लेकिन इस देरी का मतलब है कि व्यापक बैंकिंग सेवाएं, कम फंडिंग कॉस्ट और ज्यादा प्रोडक्ट ऑफरिंग अभी दूर की कौड़ी हैं। यह एक बड़ा झटका है, खासकर जब AU Small Finance Bank जैसे बैंक पहले ही इन-प्रिंसिपल अप्रूवल पा चुके हैं।

माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में लगातार बनी हुई दिक्कतें बैंक के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हैं। बढ़ते स्लिपेज (NPA में तब्दीली), बढ़ी हुई क्रेडिट कॉस्ट और घटते NIMs सीधे तौर पर कमाई पर असर डाल रहे हैं। इसके अलावा, बैंक का होलसेल टर्म डिपॉजिट्स (कुल डिपॉजिट का 35%) पर ज्यादा निर्भर रहना, एक मजबूत CASA बेस की तुलना में फंडिंग कॉस्ट को बढ़ाता है। प्रमोटर एंटिटीज, Jana Capital और Jana Holdings की वित्तीय सेहत भी रीफाइनेंसिंग और रिपेमेंट के जोखिम पैदा कर सकती है, हालांकि बैंक लिस्टेड है और प्रमोटर होल्डिंग एक क्रिटिकल थ्रेशोल्ड से नीचे है।

सेक्टर का हाल और आगे की राह

Jana Small Finance Bank की ये दिक्कतें अकेली नहीं हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) सेक्टर ने भी FY25 में माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में बढ़ते स्ट्रेस का सामना किया है, जिससे पूरे सेक्टर में Gross Non-Performing Assets (GNPAs) FY24 के 2.7% से बढ़कर FY25 में 3.8% हो गए। सिर्फ माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में GNPA FY25 में 6.8% तक पहुँच गया।

हालांकि, कई SFBs, जिनमें Jana भी शामिल है, डायवर्सिफाई करने की कोशिश कर रहे हैं। सेक्टर में माइक्रोफाइनेंस लोन का हिस्सा कम हुआ है और MSMEs, व्हीकल और हाउसिंग सेगमेंट में लेंडिंग बढ़ी है। RBI द्वारा Priority Sector Lending (PSL) नॉर्म्स में ढील देना इस डायवर्सिफिकेशन को सपोर्ट कर रहा है।

वैल्यूएशन की बात करें तो Jana Small Finance Bank का Price-to-Earnings (P/E) ratio 13.4x है, जो कि इंडियन बैंक्स इंडस्ट्री के एवरेज 13.3x से थोड़ा ज्यादा है। यह बताता है कि सेक्टर की तुलना में यह थोड़ी महंगी हो सकती है। Ujjivan Small Finance Bank और Equitas Small Finance Bank जैसे दूसरे बैंक भी इसी तरह के दबावों का सामना कर रहे हैं, लेकिन वे भी ग्रोथ के मौके तलाश रहे हैं।

SFBs का यूनिवर्सल बैंकिंग स्टेटस के लिए जाना एक बड़ा सेक्टर-वाइड ट्रेंड है, जो उनकी परिपक्वता और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। Jana SFB की यह यात्रा, जिसमें प्रगति और बाधाएं दोनों शामिल हैं, इन स्पेशलाइज्ड लेंडर्स के लिए बदलते, लेकिन चुनौतीपूर्ण माहौल को दर्शाती है।

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