Jana SFB Share Price: ब्रोकरेज हाउस भी हैरान! लोन बुक बढ़ी, पर मुनाफा **91%** गिरा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Jana SFB Share Price: ब्रोकरेज हाउस भी हैरान! लोन बुक बढ़ी, पर मुनाफा **91%** गिरा
Overview

Jana Small Finance Bank के लिए Q3 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। जहां बैंक की लोन बुक **19%** बढ़कर **₹33,324 करोड़** और डिपॉजिट **30%** बढ़कर **₹33,733 करोड़** हो गए, वहीं प्रोविजन्स (Provisions) के भारी बोझ तले प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) **91%** की भारी गिरावट के साथ सिर्फ **₹10 करोड़** रह गया।

91% मुनाफे में गिरावट का बड़ा कारण: प्रोविजन्स का बोझ

Jana Small Finance Bank की तरफ से जारी किए गए Q3 FY26 के नतीजों में बिजनेस के फ्रंट पर तो अच्छी खबर है, लेकिन बॉटम लाइन पर भारी असर पड़ा है। बैंक के ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो (GLP) में 19% का शानदार सालाना (YoY) उछाल देखा गया, जो ₹33,324 करोड़ तक पहुंच गया। इसमें सिक्योर्ड एसेट का हिस्सा बढ़कर 73% हो गया, जिसमें 27% का दमदार सालाना ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं, कुल डिपॉजिट 30% बढ़कर ₹33,733 करोड़ पर पहुंच गए। CASA डिपॉजिट में भी 41% की मजबूत सालाना बढ़ोतरी देखी गई। बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेश्यो में मामूली सुधार हुआ और यह पिछले क्वार्टर के 2.8% से घटकर 2.5% हो गया।

हालांकि, इन सबके बावजूद, बैंक का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 91% गिरकर ₹10 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में यह ₹111 करोड़ था। पिछले नौ महीनों (Nine-Month period) में भी PAT में बड़ी गिरावट आई है, जो ₹187 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹378 करोड़ था।

मुनाफे में इस भारी गिरावट की मुख्य वजह प्रोविजन्स और कंटिंजेंसी (Provisions and Contingencies) में आया 59% का सालाना उछाल है। यह बढ़कर ₹277 करोड़ हो गया, जो कि Q3 FY26 के लिए है। इसमें तिमाही के लिए ₹70 करोड़ और नौ महीनों के लिए ₹292 करोड़ के एक्सीलरेटेड प्रोविजन्स शामिल हैं। इसके चलते, बैंक के अहम प्रॉफिटेबिलिटी रेश्यो में भारी गिरावट आई। रिटर्न ऑन एवरेज एसेट्स (RoAA) घटकर सिर्फ 0.1% और रिटर्न ऑन एवरेज इक्विटी (RoAE) 0.9% रह गया, जो पिछली तिमाहियों के मुकाबले काफी कम है।

बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 13.8% बढ़कर ₹675 करोड़ रही और ऑपरेटिंग इनकम 19.5% बढ़कर ₹920 करोड़ हो गई। लेकिन, ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस 28.9% बढ़कर ₹633 करोड़ हो गए, जिसकी वजह से कॉस्ट टू इनकम रेश्यो बढ़कर 68.8% हो गया।

आगे क्या उम्मीदें? (Outlook)

बैंक के एमडी और सीईओ अजय कवल का कहना है कि NPA फ्लो में कमी आने से Q4 FY26 से क्रेडिट कॉस्ट में नरमी आने की उम्मीद है। उनका मानना है कि FY27 से गारंटी प्रोग्राम्स में भागीदारी के कारण रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) में लगभग 50-70 बेसिस पॉइंट का सुधार देखने को मिल सकता है। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) 20.0% और लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (LCR) 120% पर मजबूत बना हुआ है, जो रेगुलेटरी कंप्लायंस और लिक्विडिटी बफर्स की मजबूती को दर्शाता है।

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