Jana SFB में TVS ग्रुप की एंट्री अटकी: RBI की मंजूरी का इंतज़ार, प्रमोटर पर कर्ज का साया

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Jana SFB में TVS ग्रुप की एंट्री अटकी: RBI की मंजूरी का इंतज़ार, प्रमोटर पर कर्ज का साया

Jana Small Finance Bank (Jana SFB) इन दिनों एक बड़ी मुश्किल में फंसा हुआ है। बैंक को TVS ग्रुप से करीब **1,000 करोड़** रुपये का निवेश मिलना है, लेकिन इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी का इंतजार है। यह डील तब तक अटकी रहेगी जब तक बैंक के प्रमोटर होल्डिंग कंपनियों के चल रहे कर्ज डिफॉल्ट का मामला सुलझ नहीं जाता।

प्रमोटर पर कर्ज का साया, डील पर असर

Jana SFB के मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रमोटर एंटिटीज - Jana Holdings और Jana Capital Ltd. - की आर्थिक स्थिति है। हाल ही में इन कंपनियों ने नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) पर डिफॉल्ट किया है। हालांकि, इनकी लोन चुकाने की आखिरी तारीख को 30 जून 2026 से बढ़ाकर 30 दिसंबर 2026 कर दिया गया है।

बैंक के CEO अजय कवल का कहना है कि बैंक का ऑपरेशनल बिजनेस प्रमोटर की कर्ज की दिक्कतों से अलग है। लेकिन, सच यह भी है कि प्रमोटर को अपनी हिस्सेदारी बेचकर ही इस कर्ज को चुकाना होगा। ऐसे में, RBI का हरी झंडी दिखाना या न दिखाना, दोनों ही चीजें प्रमोटर की लोन चुकाने की क्षमता पर निर्भर करेंगी। रेगुलेटर्स भी प्रमोटर लेवल पर फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर बारीकी से नजर रखते हैं।

यूनिवर्सल बैंक बनने का सपना, कब होगा पूरा?

सिर्फ कैपिटल इन्फ्यूजन ही नहीं, Jana SFB का यूनिवर्सल बैंक बनने का लंबा लक्ष्य भी अधर में लटका है। अक्टूबर 2025 में RBI ने बैंक के लाइसेंस एप्लीकेशन को लौटा दिया था, क्योंकि बैंक कुछ जरूरी शर्तों को पूरा नहीं कर पाया था।

बैंक ने अभी यह नहीं बताया है कि वे कब तक अपना एप्लीकेशन दोबारा सबमिट करेंगे। फिलहाल, उनका पूरा ध्यान इंटरनल गवर्नेंस और स्ट्रक्चरल मैटर्स को सुलझाने पर है। ऐसे में, Jana SFB की स्थिति AU Small Finance Bank से अलग है, जिसे पहले ही यूनिवर्सल बैंक बनने की इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल चुकी है। Ujjivan Small Finance Bank का एप्लीकेशन भी पहले लौटाया गया था।

फाइनेंशियल स्ट्रेटेजी और भविष्य की राह

इन सब दिक्कतों के बावजूद, बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपने प्रॉफिटेबिलिटी गाइडेंस को बनाए रखा है। पहली तिमाही में डिपॉजिट ग्रोथ धीमी रही, क्योंकि बैंक ने महंगी बल्क डिपॉजिट्स पर निर्भरता कम करने का फैसला लिया।

मैनेजमेंट को उम्मीद है कि माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में सुधार उनके फाइनेंशियल लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा। अनुमान है कि नेट इंटरेस्ट मार्जिन (कमाए गए ब्याज और दिए गए ब्याज का अंतर) करीब 7.5% के आसपास बना रहेगा। बैंक का लक्ष्य एसेट्स पर रिटर्न (ROA) 1.3% से 1.4% के बीच रहने का है। निवेशकों को TVS डील पर RBI के फैसले और प्रमोटर ग्रुप के कर्ज चुकाने की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।

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